कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि देश में यहूदी विरोधी घटनाएं चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई हैं और यहूदी समुदाय लगातार हमलों का सामना कर रहा है। सरकार ने धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए 7.5 करोड़ डॉलर की सहायता और नफरत से निपटने के लिए नई सलाहकार परिषद बनाने की घोषणा की।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि देश यहूदी समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा है और यहूदी नागरिक लगातार नफरत तथा हिंसा का शिकार बन रहे हैं। टोरंटो के होली ब्लॉसम टेंपल में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कनाडा में यहूदी विरोधी घटनाएं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। कार्नी ने कहा कि पिछले वर्ष कनाडा में धर्म के आधार पर दर्ज कुल घृणा अपराधों में दो-तिहाई से अधिक मामले यहूदी समुदाय के खिलाफ थे, जबकि देश की कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी केवल 1 प्रतिशत है। उन्होंने माना कि कनाडा का सामाजिक ढांचा यहूदी नागरिकों को पर्याप्त सुरक्षा देने में असफल साबित हो रहा है।
यहूदियों को कैसे बनाया गया निशाना?
प्रधानमंत्री ने बताया कि यहूदी स्कूलों पर गोलियां चलाई गईं, आराधना स्थलों पर पेट्रोल बम फेंके गए और सामुदायिक केंद्रों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा यहूदी स्वामित्व वाले कारोबारों पर हमले हुए और विश्वविद्यालय परिसरों में यहूदी छात्रों को असुरक्षित माहौल का सामना करना पड़ा। कार्नी ने कहा कि यहूदी विरोधी घटनाएं केवल कनाडा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी बढ़ी हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि कनाडा में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है और इससे निपटने के लिए लक्षित कदम उठाने की जरूरत है।
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गौरतलब है कि अक्तूबर 2023 में इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया के कई देशों में यहूदी विरोधी घटनाओं में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इस बीच, नोआह ने कहा कि कनाडाई सरकार को यहूदी समुदाय की सुरक्षा मजबूत करने और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने बीते एक वर्ष में घृणा अपराधों और यहूदी विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए कई कानून पेश किए हैं। इसके तहत 7.5 करोड़ कनाडाई डॉलर (करीब 5.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर) की राशि धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा बढ़ाने पर खर्च की जाएगी। इस धन का उपयोग सुरक्षा उपकरण, निगरानी व्यवस्था और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के लिए किया जाएगा।
पीएम कार्नी ने एक नए मंत्रिस्तरीय सलाहकार परिषद के गठन की भी घोषणा की, जो यहूदी विरोधी घटनाओं के कारणों, उनके प्रभाव और उनसे निपटने के उपायों का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर शिक्षा, जागरूकता, रोकथाम और सामुदायिक सुरक्षा से जुड़े नए कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। हालांकि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार के संभावित कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन किसी समुदाय को नफरत और डर के कारण सार्वजनिक संस्थानों से दूर होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।