फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या रूस कर सकता है चीन के साथ सैनिक संधि? राष्ट्रपति पुतिन ने दिए संकेत

Fri, 23 Oct 2020 02:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को

सार

  • नाटो की तर्ज पर संधि की तैयारी, मालाबार सैन्य अभ्यास के जवाब की तैयारी
  • पुतिन बोले, रूस और चीन नियमित रूप से करते हैं साझा सैनिक अभ्यास
विज्ञापन
jinping and putin - फोटो : Amar Ujala (File)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसे ना सिर्फ एशिया, बल्कि दुनिया भर में सतर्क निगाहों से देखा जाएगा। भारत के लिए तो इस पर गौर करना बेहद अहम है। पुतिन ने कहा कि वे रूस और चीन के बीच सैनिक संधि करने पर विचार करने को तैयार हैं। ये संधि कुछ उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) जैसी हो सकती है। नाटो पश्चिमी देशों के बीच सैनिक संधि है, जिसमें यह प्रावधान है कि किसी एक देश पर हमला होने पर संधि के सदस्य बाकी देश भी उसे खुद पर हमला मानेंगे।

विज्ञापन


मास्को स्थित थिंक टैंक 'वल्दाई डिस्कशन क्लब' के सदस्यों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए गुरुवार रात पुतिन ने कहा कि फिलहाल ऐसी किसी संधि के प्रस्ताव पर विचार नहीं चल रहा है, लेकिन इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस सिलसिले में उन्होंने ध्यान दिलाया कि रूस और चीन नियमित रूप से साझा सैनिक अभ्यास करते हैं। वे आपस में न सिर्फ हथियारों की खरीद-बिक्री करते हैं, बल्कि संवेदनशील तकनीक का आदान-प्रदान भी करते हैं। पुतिन ने कहा- हमने हमेशा ये माना है कि हमारे रिश्ते संपर्क और विश्वास के ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं, जहां सिद्धांततः ऐसी संधि की जरूरत नहीं है, लेकिन इसकी कल्पना बिल्कुल संभव है।

पुतिन के इस बयान से तेजी से उभरते नए ‘शीत युद्ध’ के परिदृश्य में एक नया आयाम जुड़ा है। पश्चिमी देशों- खासकर अमेरिका ने चीन की बढ़ती ताकत और आर्थिक प्रभाव को सीमित करने के लिए पुरजोर मुहिम छेड़ दी है। अब ये आम धारणा बन गई है कि तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी चुनाव से इस स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। चीन को नियंत्रित करने के सवाल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन में आम सहमति दिख रही है। उस हाल में अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा अभी लंबे समय तक जारी रहने वाली है। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप रूस के प्रति नरम रुख रखते हैं, जबकि संकेत हैं कि बिडेन अगर जीते तो वे रूस के मामले में भी सख्त रुख अपनाएंगे। उस हाल में रूस और चीन के बीच निकटता और बढ़ना एक स्वाभाविक घटना होगी।
विज्ञापन


भारत का खुलकर अमेरिकी नेतृत्व वाले चौगुट (क्वैड) में शामिल हो जाना इस परिदृश्य का एक और अहम पहलू है। इसी हफ्ते भारत ने मालाबार अभ्यास- 2020 में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया को औपचारिक न्योता भेज दिया। इस सैनिक अभ्यास में भारत के साथ अमेरिका और जापान पहले से शामिल रहे हैं। इस तरह इस बार ये आयोजन चौगुट भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का साझा सैनिक अभ्यास होगा। ये चारों वो देश हैं, जिनके चीन के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हैं। अभी हाल तक रूस भारत का सहयोगी रहा है। वह भारत के लिए हथियारों का सबसे बड़ा सप्लायर था। लेकिन अब ये दर्जा अमेरिका को हासिल हो गया है। इस बीच रूस के पाकिस्तान से संबंध मजबूत हुए हैं। यानी चीन, पाकिस्तान और रूस का एक गठजोड़ उभरने की संभावना पैदा हुई है।

ऑस्ट्रेलिया को मालाबार अभ्यास का न्योता दिए जाने के बाद चीन के सरकारी अखबार द ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में इस पर पड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उसने कहा कि यह चीन पर दबाव बढ़ाने की कोशिश है। अखबार ने कहा कि अमेरिका ने चौगुट (क्वैड) को ‘एशियाई नाटो’ में तब्दील कर दिया है। इसके बाद पुतिन का चीन के साथ नाटो जैसी संधि से इंकार ना करने का बयान आया है। इससे ये धारणा गहराएगी कि दुनिया तेजी से एक नए शीत युद्ध की तरफ बढ़ रही है और इस बार इसका मुख्य अखाड़ा एशिया- प्रशांत क्षेत्र हो सकता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें