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क्या दूषित और पैकेज्ड फूड के माध्यम से फैल सकता है कोरोना वायरस?

Thu, 20 Aug 2020 08:39 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
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पैकेजिंग फूड से फैल सकता है कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala
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कोरोना वायरस को लेकर एक शोध यह भी है कि दूसरे देशों की सीमा से भी खाने के जरिए वायरस फैलने की संभावना रहती है लेकिन दूषित खाने पर वैज्ञानिकों का ज्यादा फोकस है। चीन ने कई बार पैकेजिंग और फूड पर रोगजनक के निशान पाए हैं। चीन की ओर से ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बीजिंग और डैलियन की पोर्ट सिटी में हाल ही में कोरोना के मामले का कारण आयातित सामान हो सकता है।

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वायरस के संक्रमण को देखते हुए चीन ने कोरोना वायरस हॉटस्पॉट में फ्रॉजन मीट के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और मीट प्रोसेसिंग प्लांट्स वायरस को फैलाने के लिए उचित पर्यावरण हैं। लेकिन इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि वायरस खाने के जरिए फैल सकता है या नहीं और वैज्ञानिकों को शक है कि अगर ऐसा है तो यह बहुत बड़ा खतरा है।

हांगकांग विश्वविद्यालय के महामारीविद और जैव सांख्यिकी के प्रमुख बेंजामिन काउलिंग कहते हैं कि हम सब जानते हैं कि फ्रॉजन वायरस लंबे समय के लिए जीवित रह सकता है। इसका मतलब यह है कि इस थ्योरी में इस बात की संभावना है कि वायरस फ्रॉजन खाने के जरिए फैल सकता है। 
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बेंजामिन काउलिंग ने कहा कि सच्चाई यह है कि इसका खतरा काफी कम है। ऐसा होने के लिए वायरस को फ्रीजिंग से लेकर डीफरोस्टिंग तक जीवित रहने की जरुरत पड़ेगी। इसके लिए वायरस को एक हाथ से दूसरे के हाथ और फिर नाक और मुंह तक जीवित रहना होगा। 

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि ये संक्रमण का लगातार तरीका होगा, लेकिन इस तरह से वायरस का फैलना संभव है। निर्णायक प्रमाण ना होने की वजह से चीन एहतियाती कदम उठा रहा है। चीन अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ के प्रमुख व्यवधान बना रहा है। 

चीन के दक्षिणी समुद्री तटीय शहर गुआंगजो की कोल्ड चैन एसोसिएशन ने कोरोना वायरस वाले इलाकों में अपने सभी सदस्य कंपनियों को आयातित फ्रॉजन मीट और सी फूड ऑर्डर रद्द करने के लिए कहा है। स्थानीय सरकार की शिकायत के बाद ये आदेश पारित किया गया।

चीन के शेंजेंग शहर में ब्राजील से मंगाए गए चिकन विंग्स के पैकेट की सतह पर वायरस पाया गया, जिसके बाद स्थानीय सरकार ने उस जगह को लेकर शिकायत दर्ज की। ऐसा ही एक मामला हांगकांग से आया, वहां भी सामान प्लांट से फ्रॉजन खाना आयात किया गया था।

न्यूजीलैंड में पिछले 102 दिनों से वायरस का कोई मामला नहीं देखा गया लेकिन पिछले हफ्ते कोरोना वायरस के मामलों में उछाल से सरकार के मन में सवाल पैदा हो गया है कि क्या फ्रॉजन सामान मंगाने से वायरस दोबारा फैल सकता है क्योंकि न्यूजीलैंड में कोरोना के नए मामले स्थानीय मामलों से नहीं फैले हैं।

हेल्थ एशले ब्लूमफील्ड के महानिदेशक का कहना है कि संयंत्र में पर्यावरणीय परीक्षण से प्रारंभिक निष्कर्षों ने इस सिद्धांत को खारिज किया है कि संक्रमण का मार्ग विदेशों से आने वाली फ्रॉजन सामान की सतह के माध्यम से था। सीनियर फूड स्टैंडर्ड अफसर सारह काहिल का कहना है कि ये बात सच है कि वायरस इंसान के बाहरी दुनिया में कुछ दिन तक जीवित रह सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि दूषित खाना खाकर हर दस में से एक इंसान को बीमारी लगती है। दूषित या कंटेमिनिटेड फूड खाकर हर साल 4,20,000 लोगों की जान जाती है। सी फूड, अनकूक्ड मीट और उत्पाद पर मिलने वाले सालमोनेला और नोरोवायरस से डायरिया और पेट और आंतों में जलन जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

हालांकि डायरिया भी कोविड-19 का एक लक्षण है लेकिन जानकार अभी इस बात पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं कि क्या वायरस किसी कंटेमिनिटेड फूड आइटम की सतह को छूने पर किसी इंसान के श्वासतंत्र तक पहुंच सकता है।

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