कंबोडिया में नौकरी घोटाले में फंसने के बाद 25 और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित देश वापस लाया गया। कंबोडियाई अधिकारियों के सहयोग से शुरू हुए बचाव अभियान में भारतीय दूतावास के पांच कांसुलर और दूतावास अधिकारियों ने मदद की। इनसे भारतीय नागरिकों को महत्वपूर्ण मदद मिली।
दूतावास ने पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को मदद देने के साथ ही सलाह की पेशकश की। इसके साथ ही पीड़ितों को टिकट खरीद, परेशानी मुक्त चेक-इन और आव्रजन प्रक्रियाओं के लिए एयरलाइंस के साथ संपर्क की सुविधा भी दी गई। इस तरह से दो दर्जन से अधिक भारतीय नागरिक को बचाकर 23 मई, 2024 को 9:30 बजे जेटस्टार की उड़ान 3K592 से देश लाया गया। इसके बाद इन लोगों ने 24 मई, 2024 को 5:15 बजे एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI451 से विशाखापत्तनम तक की यात्रा की।
विशाखापत्तनम के पुलिस आयुक्त रविशंकर अय्यर ने कहा, आज हमारे पास दस पीड़ित आए हैं और अन्य 15 से 18 रास्ते में हैं। वे अगली उड़ान से आएंगे। हम कंबोडिया में सेटअप के बारे में सभी जानकारी हासिल करेंगे, जो वहां सभी साइबर अपराध के मामलों को संभाल रहा है। उन्होंने बताया कि एजेंट ने युवाओं को भारत में भर्ती और उन्हें डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजा। अब तक हमें दो महिला पीड़ितों के बारे में भी पता चला है। इनमें से एक केरल से हैं। उन्हें भी प्रताड़ित किया गया।
कंबोडिया में भारतीय दूतावास फर्जी नौकरी घोटाले में फंसे भारतीय नागरिकों की परेशानी दूर करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा। दूतावास ने कंबोडिया में रोजगार चाहने वाले भारतीय नागरिकों से सावधानी बरतने को कहते हुए सलाह जारी की। इसमें भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) के अधिकृत एजेंटों के जरिए ही नौकरियां पाने पर जोर दिया गया है। कंबोडिया से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारतीय दूतावास कंबोडियाई अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। भारतीय नागरिकों की मदद लिए दूतावास ने सिहानोकविले में एक अस्थायी नियंत्रण कक्ष भी बनाया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले कंबोडिया में धोखाधड़ी करने वाले नियोक्ताओं से बचाए गए 60 भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी हुई। इन्हें 20 मई को जिनबेई-4 से बचाया गया था। इनकी स्वदेश वापसी में सिहानोकविले के अधिकारियों ने अहम योगदान दिया। यह बचाव अभियान भारतीय और कंबोडियाई अधिकारियों के बीच सहयोगात्मक कोशिशों को दिखाता है। अब तक दूतावास के हस्तक्षेप के जरिए 380 से अधिक भारतीय नागरिकों को बचाकर वापस लाया गया है।