कैलिफोर्निया में गंदे पानी की जांच में नया कोरोना वेरिएंट बीए.3.2 सामने आया है। इसमें 70 से 75 म्यूटेशन हैं, जो स्पाइक प्रोटीन में केंद्रित हैं। फिलहाल यह वेरिएंट सीमित मामलों तक ही सीमित है और तेजी से फैलने का संकेत नहीं दे रहा, लेकिन विशेषज्ञ इसे लेकर सतर्क हैं। क्या भारत में भी इस नए स्वरूप की संभावना नजरअंदाज की जा रही है?
अमेरिकी कैलिफोर्निया प्रांत में वेस्टवॉटर जांच के दौरान कोरोना का एक नया स्वरूप (वेरिएंट) बीए.3.2 सामने आया है। इसने एक बार फिर संकेत दिया है कि वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह लगातार स्वरूप बदल रहा है। इसमें बड़ी संख्या में म्यूटेशन पाए गए हैं, लेकिन अभी तक इसके कारण न तो संक्रमण में तेज उछाल दिखा है और न ही गंभीर बीमारी के स्पष्ट संकेत मिले हैं।
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सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार बीए.3.2 वेरिएंट की पहचान सबसे पहले कैलिफोर्निया में गंदे पानी यानी वेस्टवॉटर की जांच के दौरान हुई। इस तकनीक से नए वेरिएंट का शुरुआती पता लगाया जाता है। बाद में कुछ मरीजों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में भी इस वेरिएंट की पुष्टि हुई। बीए. 3.2, ओमिक्रॉन परिवार से जुड़ा एक नया सब-वेरिएंट है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक इसमें लगभग 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं, जिनमें से कई स्पाइक प्रोटीन में हैं। यही प्रोटीन वायरस को कोशिकाओं में प्रवेश में मदद करता है। अधिक म्यूटेशन होने के कारण इस वेरिएंट पर वैज्ञानिकों की विशेष नजर है।
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फैलाव की रफ्तार फिलहाल धीमी
हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि इसके म्यूटेशन इसे फैलने में मदद कर सकते हैं, लेकिन अभी तक यह वेरिएंट बहुत सीमित मामलों में ही पाया गया है। अमेरिका में कुल कोविड मामलों में इसकी हिस्सेदारी बेहद कम है और यह किसी नई लहर का कारण नहीं बना है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल इसकी ट्रांसमिशन क्षमता व्यापक स्तर पर प्रभाव नहीं डाल रही।
वायरस खत्म नहीं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में
बीए.3.2 वेरिएंट यह दर्शाता है कि कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि नए रूपों में सामने आता रहेगा। हालांकि मौजूदा स्थिति में यह वेरिएंट न तो अत्यधिक खतरनाक साबित हुआ है और न ही तेजी से फैलता दिख रहा है। फिर भी आम लोगों के लिए सावधानी ही सबसे बेहतर बचाव बनी हुई है।