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US: कैलिफोर्निया असेंबली की संसद से मांग- 1984 सिख विरोधी हिंसा को नरसंहार के रूप में दें मान्यता

Wed, 12 Apr 2023 11:24 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, वाशिंगटन।

सार

यह प्रस्ताव 22 मार्च को विधानसभा सदस्य जसमीत कौर बैंस (Jasmeet Kaur Bains) द्वारा पेश किया गया था और सोमवार को राज्य विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया। जसमीत कौर राज्य विधानसभा की पहली  निर्वाचित सिख सदस्य हैं।
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California State Assembly - फोटो : Wikipedia
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विस्तार
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कैलिफर्निया राज्य विधानसभा ने अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) से औपचारिक रूप से भारत में 1984 की सिख विरोधी हिंसा को नरसंहार के रूप में मान्यता देने और निंदा करने का अनुरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।

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यह प्रस्ताव 22 मार्च को विधानसभा सदस्य जसमीत कौर बैंस (Jasmeet Kaur Bains) द्वारा पेश किया गया था और सोमवार को राज्य विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया। जसमीत कौर राज्य विधानसभा की पहली निर्वाचित सिख सदस्य हैं। यह प्रस्ताव विधानसभा सदस्य कार्लोस विलापुदुआ (Carlos Villapudua) द्वारा सह-प्रायोजित था। विधानसभा में एकमात्र अन्य हिंदू सदस्य ऐश कालरा ने भी इसके पक्ष में मतदान किया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका में सिख समुदाय दंगों के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक आघात से अब तक उबर नहीं पाया है। प्रस्ताव में अमेरिकी कांग्रेस से औपचारिक रूप से नवंबर 1984 की सिख विरोधी हिंसा को नरसंहार के रूप में मान्यता देने और निंदा करने का आग्रह किया गया है। प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि नई दिल्ली में 'विधवा कॉलोनी' में अभी भी उन सिख महिलाओं का घर है जिन पर हमला किया गया, दुष्कर्म किया गया, प्रताड़ित किया गया और जिन्हें परिवारों का बहिष्कार, जलाने और हत्या को देखने के लिए मजबूर किया गया और जो अभी भी अपराधियों के खिलाफ न्याय की मांग कर रही हैं।
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अमेरिकी सिख कॉकस कमेटी और अन्य अमेरिकी सिख निकायों के समन्वयक प्रितपाल सिंह ने एक बयान में प्रस्ताव पेश करने और इसे पारित करने के लिए कैलिफोर्निया राज्य विधानसभा के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया है। इससे पहले 2015 में भी कैलिफोर्निया विधानसभा ने सिख विरोधी हिंसा को नरसंहार करार देते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था।

बता दें कि 31 अक्टूबर, 1984 को पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में हिंसा भड़क उठी थी। इसके बाद हुई हिंसा में भारत भर में 3,000 से अधिक सिख मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मारे गए थे।

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