ब्रिटेन के अधिकारी कोरोना वायरस के एक नए स्ट्रेन को चिंताजनक घोषित कर सकते हैं। यह स्ट्रेन सबसे पहले भारत में पाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनसार वैज्ञानिकों को इस बात के सबूत मिले हैं कि यह नया स्ट्रेन वायरस के मूल प्रकार के मुकाबले अधिक तेजी से फैलता है। कोरोना के मूल भारतीय वेरिएंट बी.1.617 का पता सबसे पहले पिछले साल अक्तूबर में चला था।
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) ने इसे तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। वैज्ञानिकों ने सबसे पहले भारत में पाए गए वेरिएंट का एक प्रकार बी.1.617.2 को 'चिंता का विषय' बताया है। कोरोना के इस स्वरूप के अलावा अब तक बी.1.617 और बी.1.617.3 पर शोध चल रहा है। पीएचई के आंकड़ों के मुताबिक, बी.1.617 के 61 नमूनों समेत कुल 500 नमूनों पर शोध किया जा रहा है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह मानना है कि कोरोना का बी.1.617.2 स्वरूप ब्रिटेन में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार कैंट स्वरूप के मुकाबले कम संक्रामक है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बात के अब तक कोई सुबूत नहीं मिले हैं जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि कोरोना वायरस के भारतीय स्वरूप पर वैक्सीन काम नहीं करेगी।
दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और भारत में पाए गए कोरोना के स्वरूपों में स्पाइक प्रोटीन में बदलाव देखने को मिला है जिसके जरिए यह मानव कोशिकाओं से जुड़ जाता है। दरअसल, किसी भी वायरस की यह प्रकृति होती है कि वह म्यूटेट हो कर अपने रूप और अस्तित्व को बरकरार रखे। भारत में कोविड की दूसरी लहर के पीछे वायरस के इसी स्वरूप को जिम्मेदार माना जा रहा है।