ब्रेग्जिट के लिए ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच चल रही बातचीत शुक्रवार रात टूट गई। उसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगाया है। इस बीच ब्रिटिश मीडिया ने खबर दी है कि अब प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सीधे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरुसुला वॉन डेर लियेन से बातचीत करेंगे।
बातचीत टूटने के बाद ब्रिटेन के मुख्य वार्ताकार डेविड फ्रॉस्ट और ईयू के मुख्य वार्ताकार मिशेल बर्नियर ने कहा कि अंतिम बचे मुद्दों पर सहमति बनाने में वे नाकाम रहे हैं। इसलिए ब्रेग्जिट (ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की प्रक्रिया) को लेकर चल रही वार्ता फिलहाल रोकी जा रही है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच एक साल से बातचीत चल रही थी। मगर इसमें सहमति नहीं बनी। इसलिए इस बात की संभावना कम ही है कि जॉनसन और वॉन डेर लियेन के बीच फोन पर होने वाली सीधी बातचीत से कोई हल निकल पाएगा।
बताया जाता है कि जिन मुद्दों पर तीखे मतभेद बने रहे, उनमें एक ईयू की तरफ से दी जाने वाली सहायता का था। ईयू के वार्ताकार इस पर अड़े रहे कि ब्रिटेन को दी जाने वाली सहायता ईयू के सहायता नियमों से अलग होगी। ये विवादास्पद मुद्दा ईयू की तरफ से कुछ हफ्ते पहले बातचीत की मेज पर लाया गया था और इसका हल शुक्रवार रात तक नहीं निकल पाया। ब्रिटेन का दावा है कि मछली मारने के समुद्री अधिकार क्षेत्र को लेकर मतभेद बना रहा।
ब्रिटेन चाहता है कि मछली मारने के नए नियमों को लागू करने के पहले सिर्फ दस साल की ट्रांजिशन अवधि तय की जाए। लेकिन ईयू का कहना है कि असल मुद्दा यह है कि ब्रिटेन इस मामले में अवधि छोटी रखना चाहता है, जबकि ईयू लंबी अवधि की वकालत कर रहा है। लेकिन इस सवाल पर बीच का रास्ता निकाला जा सकता है।
शुक्रवार को जारी वार्ता के बीच जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने दखल दिया। उन्होंने दोनों पक्षों से अपील की कि उन्होंने जो शर्तें तय कर रखी हैं, उन पर लचीला रुख अपनाएं। उधर फ्रांस ने धमकी दी कि अगर समझौता उसकी अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं रहा, तो वह इसे वीटो कर देगा।
फ्रांस, नीदरलैंड्स, डेनमार्क और इटली ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपना रखा है। इनसे अलग हटते हुए मैर्केल ने कहा कि अगर समझौते तक पहुंचना है, तो सबको कुछ और रियायत देनी होगी। मैर्केल के प्रवक्ता ने कहा कि जर्मन चांसलर का पुराना रुख है और इसे ही उन्होंने शुक्रवार को दोहराया।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जल्द से जल्द समझौता चाहते हैं। उन्होंने अपनी जनता से अगले एक जनवरी से ये समझौता लागू करने का वादा किया हुआ है। वे चाहते हैं कि क्रिसमस के पहले ब्रिटिश संसद के दोनों सदन समझौते का अनुमोदन कर दें।
ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि अब अगर समझौते में एक हफ्ते से अधिक देर होती है, तो ब्रिटिश सांसदों को 23 दिसंबर के बाद भी बैठक के लिए तैयार होना पड़ सकता है। अभी के कार्यक्रम के मुताबिक 23 दिसंबर को संसद क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के लिए स्थगित हो जाएंगी।
लेकिन ईयू की तरफ से मिल रहे संकेत ये भरोसा नहीं बंधाते कि समझौता जल्द से जल्द हो पाएगा। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने कहा है कि ईयू के सभी सदस्य देशों को समझौते की हर धारा की जांच-परख करने के लिए पूरा मौका दिया जाएगा।
इसे देखते हुए ब्रिटेन की सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी के कुछ नेता फिर से नो डील ब्रेग्जिट की बात करने लगे हैं। यानी बिना समझौता हुए ही ब्रिटेन खुद को ईयू से अलग कर लेगा। ये स्थिति ब्रिटिश और ईयू दोनों की अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक मानी गई है। साथ ही उस हाल में मछली मारने जैसे मुद्दों पर टकराव भी खड़ा हो सकता है। ईयू क्षेत्र में टकराव बढ़ा, तो उसका असर सारी दुनिया की अर्थव्यस्थाओं पर होगा। इसीलिए ब्रेग्जिट वार्ता में आए गतिरोध से दुनिया की चिंता बढ़ गई है।