ब्रिटिश सांसदों ने यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर निकलने के लिए सरकार के तीन समझौतों को खारिज करने के बाद ब्रेग्जिट के लिए चार संभावित वैकल्पिक योजनाओं के खिलाफ मतदान किया। इनमें कस्टम यूनियम और नार्वे जैसी व्यवस्था और ब्रिटेन को एकीकृत बाजार में रखने पर भी मतदान हुआ, लेकिन बहुमत नहीं मिला। इस तरह ब्रिटेन की संसद में असमंजस अब भी बरकरार है।
संसद में हुआ यह मतदान भले ही कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है क्योंकि यदि किसी प्रस्ताव पर बहुमत मिल भी जाता तो सरकार उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होती। लेकिन इससे पता चल जाता कि सांसद आखिर चाहते क्या हैं। ईयू से अलग होने के बाद उससे बेहद घनिष्ठ आर्थिक रिश्ते जारी रखने, दूसरा जनमत संग्रह कराने या बिना किसी समझौते के ब्रेग्जिट को रोकने में से किसी भी प्रस्ताव को बहुमत हासिल नहीं हो पाया। दूसरा जनमत संग्रह कराने के समर्थन में सबसे अधिक 280 मत पड़े लेकिन इसके खिलाफ 292 मत डाले गए।
इसके बाद यूरोपीय संघ के साथ स्थायी ‘कस्टम यूनियन’ में बने रहने के प्रस्ताव के पक्ष में दूसरे सबसे अधिक 273 मत पड़े लेकिन इसके खिलाफ 276 वोट पड़ने से इसे भी बहुमत नहीं मिल पाया। अब कानूनी स्थिति यह है कि ब्रिटेन बिना किसी समझौते के यूरोपीय संघ से केवल 11 दिनों के भीतर बाहर हो जाएगा।
12 अप्रैल को बिना समझौते बाहर निकलने का विकल्प, एक लंबा विस्तार होगा जिसका मतलब है कि यूरोपीय संसद चुनाव कराने होंगे। हालांकि यदि ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ इस सप्ताह समझौते पर राजी हो गया तो शायद यूरोपीय संसद चुनाव कराने की जरूरत ना पड़े।