फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Britain: पीएम लिज ट्रस ने पिया अपमान का घूंट, लेकिन जनता में घटा नहीं है असंतोष

Wed, 05 Oct 2022 06:29 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

Britain: ट्रस सरकार ने पिछले हफ्ते टैक्स में बड़ी छूट का एलान किया था। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के सबसे धनी तबकों को मिलता। सरकार ने कहा था कि ऐसा उसने आर्थिक विकास दर बढ़ाने के लिए किया था, ताकि मंदी में फंस रही अर्थव्यवस्था को उबारा जा सके...
विज्ञापन
liz truss - फोटो : instagram/elizabeth.truss.mp
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

टैक्स छूट के सवाल पर यू-टर्न लेकर ब्रिटेन की लिज ट्रस सरकार ने गहरे अपमान का घूंट पिया है। इसे ब्रिटेन के ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों के संघर्ष की जीत के रूप में भी देखा गया है। लेकिन अब इन हलकों में यह आशंका गहरा गई है कि जिन निवेशकों को संतुष्ट करने के लिए ट्रस सरकार ने यह कदम उठाया, उन्हें लुभाने के लिए अब वह देश में जरूरी क्षेत्रों में सरकारी खर्च को घटा सकती है। निवेशक लगातार सरकार से अपना खर्च घटाने की मांग कर रहे हैं।

ट्रस सरकार ने पिछले हफ्ते टैक्स में बड़ी छूट का एलान किया था। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के सबसे धनी तबकों को मिलता। सरकार ने कहा था कि ऐसा उसने आर्थिक विकास दर बढ़ाने के लिए किया था, ताकि मंदी में फंस रही अर्थव्यवस्था को उबारा जा सके। लेकिन इस कदम से निवेशकों में ब्रिटिश सरकार के बॉन्ड बेचने की होड़ लग गई। इससे ब्रिटेन अभूतपूर्व वित्तीय संकट में फंस गया।

वित्त मंत्री क्वासी क्वार्तेंग ने स्वीकार किया कि टैक्स कटौती की योजना उन्होंने जन आक्रोश को ध्यान में रखते हुए वापस ली है। उन्होंने कहा- ‘हमने लोगों की बात सुनी है।’ कई ट्रेड यूनियनें और जन संगठन इस योजना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। बीते शनिवार को ब्रिटेन के कई शहरों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिनमें एक लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। इन प्रदर्शनों का आयोजन ‘इनफ इज इनफ’ (अब हद हो गई) अभियान ने किया। ये अभियान ब्रिटेन में महंगाई के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए कुछ महीने पहले शुरू किया गया था।

ब्रिटेन में अभी कई क्षेत्रों के हजारों कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उनके नेताओं ने सरकार के कदम वापस खींचने का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने इसे अपनी आंशिक जीत ही माना है। अखबार द मॉर्निंग स्टार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आंदोलनकारी नेताओं ने ध्यान दिलाया है कि क्वार्तेंग ने जिस ‘जन विरोधी’ मिनी बजट में टैक्स कटौती योजना का एलान किया था, उसके ज्यादातर बाकी हिस्से अभी भी लागू हैं। इन हिस्सों में सार्वजनिक सेवाओं से सरकार के हाथ खींचने से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

इस बीच ब्रिटेन के कई स्कूल और अस्पतालों के प्रशासकों ने चेतावनी दी है कि अगर ऊर्जा की महंगाई जारी रही, तो उन्हें अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा है कि वे बढ़ी ऊर्जा लागत के साथ-साथ कर्मचारियों के वेतन-भत्तों और अन्य खर्चों का बोझ उठाने में अपने अक्षम पा रहे हैं। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि कर्मचारियों में कटौती हुई, तो उसका विनाशकारी असर देखने को मिलेगा। ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा है कि ट्रस सरकार ने स्कूलों और अस्पतालों को राहत देने के बजाय धनी लोगों की मदद करने में जुटी हुई है।

ब्रिटिश अखबारों में छपी रिपोर्टों में बताया गया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा कर्मी कोरोना महामारी के समय से ही मुश्किलें झेल रहे हैं। उस दौरान काम का सबसे ज्यादा बोझ उन पर ही पड़ा। लेकिन उन्हें कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दी गई। अब बढ़ी महंगाई के बीच उनकी नौकरी पर भी खतरा मंडरा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें