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ब्रिटेन में चौंकाने वाला मामला: 505 दिन कोरोना से लड़ने के बाद मरीज की मौत, लंबे इलाज के बाद भी नहीं बची जान  

Fri, 22 Apr 2022 09:02 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

इस शोध में कोरोना से लंबे समय तक लड़ने वाले 9 मरीजों को शामिल किया गया। इसमें 505 दिन तक वायरस से जूझने वाला मरीज भी शामिल था।
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दुनिया में कोरोना (file photo) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ब्रिटेन से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यहां एक मरीज कुल 505 दिन कोरोना से पीड़ित रहा और फिर उसकी मौत हो गई। लंबे समय तक वायरस की चपेट में रहने के कारण उसका इम्यून सिस्टम बेहद कमजोर हो गया था।

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सबसे लंबा चलने वाला कोरोना केस
ब्रिटेन के वैज्ञानिक डॉ. ल्यूक ब्लागडन स्नेल की मानें तो यह अब तक का सबसे लंबा चलने वाला कोरोना केस है। इसके पहले आधिकारिक रूप से कोरोना का सबसे लंबा मामला 335 दिन चला था। इस केस में भी मरीज की इम्यूनिटी बहुत कमजोर थी। डॉ. स्नेल और उनकी टीम ने कोरोना के लंबे मामलों की वजह जानने के लिए एक रिसर्च की है। इस रिसर्च में मरीजों के शरीर में वायरस के म्यूटेशन होने और नए कोरोना वैरिएंट्स बनने की जांच की गई।

शोध में कोरोना से लंबे समय तक लड़ने वाले 9 मरीजों को शामिल किया गया। इसमें 505 दिन तक वायरस से जूझने वाला मरीज भी शामिल था। इन सभी की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट कम से कम 8 हफ्तों तक पॉजिटिव आई। सभी लोगों की इम्यूनिटी पहले से एचआईवी, कैंसर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और दूसरी बीमारियों के कारण बेहद कमजोर थी।
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नतीजों के मुताबिक, रिसर्च में शामिल मरीजों में औसतन 73 दिन कोरोना संक्रमण बना रहा। दो लोग ऐसे थे जो एक साल से ज्यादा समय तक संक्रमित रहे। 

मरीजों में वायरस के म्यूटेशंस ट्रैक किए गए 
डॉ. स्नेल की टीम ने रिसर्च के दौरान मरीजों में वायरस के म्यूटेशंस ट्रैक किए। इससे सामने आया कि कोई भी मरीज कोरोना से ठीक होकर दोबारा उसका शिकार नहीं हुआ। समय जैसे-जैसे गुजरा, शरीर के अंदर वायरस भी म्यूटेट होता गया। हालांकि इनमें से कोई भी म्यूटेशन बेहद खतरनाक वैरिएंट नहीं बना, लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि यही म्यूटेशंस कोरोना के ज्यादा फैलने वाले वैरिएंट्स में भी पाए गए हैं।

505 दिन तक जूझा और 2021 में मौत हो गई
डॉ. स्नेल का कहना है कि मरीज को 2020 में कोरोना संक्रमण हुआ था, जिसके बाद वह 505 दिन उससे जूझा और 2021 में उसकी मौत हो गई। इलाज के दौरान उसे रेमडेसिविर नाम का एंटीवायरल ड्रग दिया जा रहा था। मरीज कई बीमारियों से पीड़ित था, जिसकी वजह से उसका इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया था। फिलहाल वैज्ञानिकों ने उसकी मौत का स्पष्ट कारण बताने से इनकार किया है। वहीं रिसर्च में शामिल 9 मरीजों में से दो लोग बिना किसी इलाज के ठीक हुए, दो मरीज इलाज के बाद ठीक हुए और एक मरीज अभी भी कोरोना से पीड़ित है। पिछली बार जांच होने पर उसे वायरस से लड़ते हुए 412 दिन हो चुके थे।

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