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ब्रिटेन में 'देसी-राज' : भारतवंशी प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मनवाया योग्यता का लोहा, महंगाई से होगा जमकर मुकाबला

Wed, 26 Oct 2022 04:44 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, लंदन।

सार

भारत पर 200 साल तक राज कर चुके ब्रिटेन के लिए भारतवंशी का सत्ता संभालना एक चक्र के पूरा होने जैसा है। सत्ता के शीर्ष पर पहुंचकर सुनक ने जता दिया है कि भारतीय योग्यता का लोहा हर जगह मनवा सकते हैं...
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Rishi Sunak, ऋषि सुनक - फोटो : twitter/@Rishi Sunak
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विस्तार
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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और स्टैनफोर्ड से स्नातक ऋषि सुनक (42) ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री हैं। निवेश बैंकर से राजनेता बने ब्रिटेन के पहले भारतवंशी और हिंदू प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के सामने अब देश की बदहाल अर्थव्यवस्था पर लाने की विकट चुनौती होगी। लोगों को उम्मीद है कि इस दिवाली पर प्रज्ज्वलित भारतवंशी दीप ब्रिटेन के आर्थिक अंधियारे को छांटने में समर्थ हो सकेगा।

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सुनक का जन्म ब्रिटेन के साउथेम्प्टन में भारतीय हिंदू परिवार में हुआ। उनके दादा-दादी मूलत: पंजाब के रहने वाले थे। फार्मासिस्ट मां व डॉक्टर पिता के बेटे, सुनक की शिक्षा ब्रिटेन के सबसे प्रसिद्ध और महंगे स्कूलों में से एक, विनचेस्टर और फिर ऑक्सफोर्ड में हुई। उन्होंने गोल्डमैन सैक्स ग्रुप में तीन साल काम किया और फिर कैलिफोर्निया के स्टैनफर्ड से एमबीए किया। यहीं उनकी अक्षता मूर्ति से मुलाकात हुई।

सुनक ने अरबपति हेज फंड मैनेजर क्रिस होन के टीसीआई फंड मैनेजमेंट में तीन साल काम किया। इससे बाद वह अपने टीसीआई सहयोगी पैट्रिक डेगॉर्स के हेज फंड थेलेम पार्टनर्स में शामिल हो गए। सुनक 2015 में रिचमंड, यॉर्कशायर से पहली बार संसद सदस्य (सांसद) बने।
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उन्होंने बतौर सांसद भगवद्गीता के नाम पर शपथ ली। फरवरी 2020 में उन्हें ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण कैबिनेट पद, वित्त मंत्री के रूप में नामित किया गया। पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन ने कोरोना के कारण जब देशव्यापी लॉकडाउन लगाया तब सुनक ने लाखों लोगों की नौकरियां बचाने के लिए व्यापक वित्तीय पैकेज घोषित किया।

महंगाई बनी मुश्किल
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ऊंची महंगाई दर और बढ़ती ब्याज दरों के संकट का सामना कर रही है। यूक्रेन युद्ध ने इस साल दूसरी बार ऊर्जा बिलों को बढ़ा दिया है। पौंड कमजोर है। यह सुनक के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। सुनक का पहला काम ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विश्वसनीयता बहाल करना होगा। लिज ट्रस की कर कटौती की योजना ने बांड बाजार को हिला दिया था।

हिंदू पहचान और भारतीय जड़ों पर गर्व
ऋषि को अपने हिंदू होने और अपनी भारतीय जड़ों पर गर्व रहा है। इसीलिए वित्त मंत्री बनने के बाद पहली दिवाली मनाते हुए वह अपने आवास 11, डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भी दिवाली के दीये जलाते नजर आए थे। 

ब्रिटेन का ओबामा पल
ऋषि सुनक के दादा के बनवाए हिंदू मंदिर के अध्यक्ष संजय चंद्रराणा ने कहा कि सुनक का ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनना ‘हमारे लिए बराक ओबामा पल’ जैसा है। दक्षिण पश्चिम लंदन से करीब 110 किमी दूर साउथहैंपटन में सुनक के दादा रामदास सुनक ने उनके पिता यश के साथ वर्ष 1971 में वैदिक सोसाइटी हिंदू मंदिर की स्थापना की थी और वर्ष 1980 तक न्यासी के तौर पर उनका इस मंदिर से संबंध रहा।
  • सुनक नियमित तौर पर इस मंदिर में दर्शन करने के लिए जाते हैं। उन्होंने जुलाई में भंडारा कराया था। चंद्रराणा ने बताया, मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ है और लोग उनके साथ ली गई अपनी तस्वीर दिखा रहे हैं। 
सबसे लंबा प्रथम भाषण
सुनक ने पीएम के तौर पर हाल के दशकों में डाउनिंग स्ट्रीट से सबसे लंबा प्रथम भाषण दिया। उन्होंने पांच मिनट 56 सेकंड संबोधित किया। अपवादस्वरूप 2019 में बोरिस जॉनसन का पहला भाषण 11 मिनट 13 सेकंड चला था। सुनक ने लिज ट्रस से डेढ़ गुना समय लिया। 

हम सब मिलकर ऐसा सुनहरा भविष्य तैयार करेंगे जो हमारे त्याग का फल होगा और देश के आने वाले कल को उम्मीद से भर देगा। -ऋषि सुनक

छह अन्य देशों की कमान भी भारतवंशियों के हाथ
भारतवंशी ऋषि सुनक के ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद संभालने की दुनियाभर में चर्चा है। चर्चा का कारण सुनक का महज भारतवंशी होना या देश के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपतियों में से एक इन्फोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति का दामाद होना भर नहीं है। ऋषि उस देश के शासनाध्यक्ष हैं, जिसने भारत पर करीब दो सदियों तक राज किया।  इसके अलावा, सुनक ही नहीं छह अन्य देशों में भी भारतवंशी राष्ट्राध्यक्ष या शासन प्रमुख हैं। दुनिया के विभिन्न देशों में भारतवंशियों की हनक नजर आती है। 
  • इस समय मॉरिशस, सिंगापुर, पुर्तगाल, सूरीनाम, गुयाना, सैशेल की कमान भारतवंशियों के हाथ में हैं। मॉरिशस में तो प्रधानमंत्री के साथ-साथ राष्ट्रपति भी भारतवंशी है। इतना ही नहीं, ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया समेत करीब 25 देशों में भारतवंशी 250 से ज्यादा अहम पदों पर बैठे हैं। इनमें सबसे अहम नाम अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस हैं।
इन देशों के हैं मुखिया
  • मॉरीशस : राष्ट्रपति पृथ्वीराजसिंह रूपन, पीएम प्रविंद जगन्नाथ  
  • पुर्तगाल : प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा 
  • सिंगापुर : राष्ट्रपति हालीमा याकूब 
  • सूरीनाम : राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी
  • गुयाना : राष्ट्रपति इरफान अली
  • सैशेल : राष्ट्रपति रामकलावन
भारत को नहीं पहुंचाते लाभ
भारतीय उम्मीद करते हैं कि भारतवंशी अपने शासन में भारत को तरजीह देंगे। लेकिन प्रायः इनका रुख ज्यादातर तटस्थ ही रहता है। कई बार भारत के खिलाफ नीतियों का सख्ती से पालन करते रहे हैं। कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति रहते अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान के प्रति उदार रुख दिखा रहा है।
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प्रधानमंत्री बनते ही कैबिनेट के चेहरे तय किए, हंट बने रहेंगे वित्त मंत्री, सुएला फिर गृह मंत्री
नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने वित्त मंत्री पद पर जेरेमी हंट को बरकरार रखा है तो भारतीय मूल की सुएला ब्रेवरमैन को गृह मंत्री पद पर फिर नियुक्ति दी है। जेम्स क्लेवरली विदेश मंत्री बने रहेंगे। सुएला ने पिछले हफ्ते ही त्याग-पत्र दिया था। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता वार्ता पर उन्होंने टिप्पणी की थी कि भारतीय वीजाधारकों के समय के बाद भी रुकने के कारण ब्रिटेन में समस्याएं पैदा होती हैं। अब प्रवासियों पर उनका रवैया देखने वाली बात होगी।

पूर्व प्रधानमंत्री ट्रस का मिनी बजट भारी पड़ने लगा तो वित्त मंत्री हंट को पद सौंपा गया था। वह सुनक समर्थक रहे हैं। जॉनसन सरकार में उपप्रधानमंत्री और न्याय मंत्री रहे डोमनिक राब की दोनों पदों पर वापसी हुई है। उन्होंने सुनक का समर्थन किया था। रक्षा मंत्री बेन वालेस की कुर्सी भी सुरक्षित है। नधीम जाहवी को टोरी पार्टी का नेता और बिना विभाग का मंत्री बनाया गया है। सुएला के बाद गृह विभाग संभाल रहे ग्रांट शाप्स को कारोबार मंत्री बनाया गया है।

बाहर किया
कैबिनेट ऑफिस मंत्री भारतीय मूल के आलोक शर्मा, जैकब रीस-मोग कारोबार मंत्री, न्याय मंत्री ब्रेडन लेविस, शिक्षा मंत्री किट माल्टहाउस, पर्यावरण मंत्री रानिल जयवर्धने।

सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक पंजाबियों का दबदबा
ब्रिटेन में ऋषि सुनक के पीएम बनने के साथ ही पंजाबियों का दबदबा सत्ता पक्ष से विपक्ष तक बन गया है। यहां  भारतीय मूल के 14 सांसद हैं, लेकिन अधिक दबदबा पंजाबी सांसदों का है। लेबर व कंजरवेटिव के सात-सात सांसद हैं। लेबर पार्टी के सांसद तनमन ढेसी का कहना है कि ऋषि सुनक का पीएम बनना गर्व की बात है। ढेसी पहले पगड़ीधारी सांसद हैं। ढेसी के परिवार का पंजाब में भी खासा रसूख है।

जालंधर के गांव जमशेर की प्रीत कौर गिल पिछले चुनाव में जीत हासिल कर संसद पहुंचने वाली पहली सिख महिला थीं। जालंधर के इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन लेखराज शर्मा के बेटे सांसद वीरेंद्र शर्मा भी एलिंग साउथ हॉल सीट से तीसरी बार जीते हैं। सिख की बेटी नादिया व्हिटोम यूके की युवा सांसद हैं। सुनक का परिवार विभाजन से पहले पाकिस्तान के पंजाब से ब्रिटेन चला गया था, जब भारत पाक में विभाजन नहीं हुआ था।

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