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ब्रिटेन: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय छात्रसंघ उपचुनाव जीतीं भारतवंशी अन्वी भूटानी

Sat, 22 May 2021 01:47 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, लंदन

सार

  • अन्वी भूटानी 2021-22 शैक्षणिक वर्ष के उपचुनाव के लिए मैदान में थी। बृहस्पतिवार की रात उन्हें विजेता घोषित किया गया
  • 2019 के आखिरी उपचुनाव की तुलना में 146 प्रतिशत ज्यादा रहा मतदान
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भारतवंशी अन्वी भूटानी - फोटो : twitter
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विस्तार
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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के छात्रसंघ उपचुनाव में मैग्डालेन कॉलेज से भारतीय मूल की मानव विज्ञान की छात्रा अन्वी भूटानी को अध्यक्ष चुना गया है। अन्वी यहां राजनीतिक जागरूकता को लेकर लोकप्रिय हैं। ऑक्सफोर्ड एसयू में नस्लीय जागरूकता और समानता अभियान की सह-अध्यक्ष तथा ऑक्सफोर्ड इंडिया सोसाइटी की अध्यक्ष अन्वी भूटानी ने रिकॉर्ड मतदान के बाद भारी बहुमत हासिल किया।

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अन्वी भूटानी 2021-22 शैक्षणिक वर्ष के उपचुनाव के लिए मैदान में थी। बृहस्पतिवार की रात उन्हें विजेता घोषित किया गया। चेरवेल छात्र समाचार पत्र के अनुसार भूटानी ने अपने घोषणापत्र में ऑक्सफोर्ड लिविंग वेज के कार्यान्वयन, कल्याणकारी सेवाओं को अलग करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा पाठ्यक्रम में विविधता लाने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया था।

2019 के आखिरी उपचुनाव की तुलना में 146 प्रतिशत ज्यादा रहा मतदान
जीत के बाद अन्वी ने कहा कि पाठ्यक्रम को और अधिक विविध बनाने के लिए ऑक्सफोर्ड और उपनिवेशवाद केंद्र के साथ काम करने के सुझावों का उपयोग किया जाना चाहिए। छात्र समाचार पत्र के अनुसार, उपचुनाव में अब तक का सबसे अधिक मतदान हुआ था, इसमें पिछले कई वार्षिक चुनावों की तुलना में कहीं अधिक मतदान हुआ है। इसमें 2,506 लोगों ने मतदान किया, जो 2019 में आखिरी उपचुनाव की तुलना में 146 प्रतिशत ज्यादा रहा।
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विजय घोषणा पत्र में रखा एजेंडा
अन्वी भूटानी ने अपने विजय घोषणा पत्र में कहा कि मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कार्यक्रमों के लिए अधिक वित्तपोषण को लेकर प्रचार किया जाना चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालय परामर्श सेवाओं तक अधिक पहुंच और कम प्रतीक्षा समय की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए। उपचुनाव के लिए अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया.

रश्मि सावंत के इस्तीफे से खाली हुआ पद
ये उपचुनाव भारतीय छात्र रश्मि सामंत के इस्तीफे के बाद हुआ, जिन्हें फरवरी में अपने पिछले सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद के बीच पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इस बार चुनाव मैदान में अब तक के सबसे अधिक उम्मीदवार थे, जिसमें 11 छात्र अध्यक्ष पद की होड़ में थे।

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