ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (फाइल फोटो)
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ब्रिटिश सरकार ने बृहस्पतिवार को उस नए फास्टट्रैक वीजा सिस्टम को लागू करने की योजना को हरी झंडी दिखा दी, जिसमें सरकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में खाली पड़े पदों को भरने के लिए क्वालिफाई डॉक्टरों और नर्सों को तत्काल वीजा दिए जाने का प्रस्ताव है। इसका लाभ भारतीय डॉक्टरों-नर्सों को सबसे ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है, जहां हर साल मेडिकल कॉलेजों से बड़ी संख्या में क्वालिफाई डॉक्टर और नर्स उत्तीर्ण होकर निकलते हैं।
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस नए एनएचएस वीजा का जिक्र अपने हालिया चुनावी अभियान में किया था। इसे बृहस्पतिवार को महारानी के भाषण में भी जगह दी गई। इस भाषण के जरिये क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने बोरिस जॉनसन के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित कंजरवेटिव पार्टी के संसदीय एजेंडे को सभी के सामने पेश करने की औपचारिकता पूरी की।
इस भाषण में डॉक्टरों-नर्सों व हेल्थ प्रोफेशनलों के लिए नए आसान वीजा सिस्टम के अतिरिक्त सामान्य प्रवासियों के लिए भी ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर अंक आधारित आव्रजन तंत्र लागू करने का भी जिक्र किया गया। इस तंत्र का वादा भी जॉनसन ने 12 दिसंबर के आम चुनाव से पहले अभियान के दौरान किया था।
इसका मकसद पूरे विश्व से ‘बुद्धिमान और श्रेष्ठ’ लोगों को अपने यहां काम करने के लिए आकर्षित करना है। भाषण में एक बार फिर ब्रिटेन के 31 जनवरी, 2020 की नई समयसीमा पर यूरोपीय संघ से ‘ब्रेग्जिट (नाता तोड़ लेने)’ कर लेने की भी पुष्टि की गई। साथ ही इस तारीख को ब्रेग्जिट के लिए बनाए गए डिपार्टमेंट ऑफ एग्जिटिंग द यूरोपियन यूनियन के भी खत्म हो जाने की घोषणा की गई।
ऐसा होगा नया फास्टट्रैक वीजा
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, एनएचएस पीपुल प्लान के तहत पूरे विश्व से क्वालिफाई डॉक्टरों, नर्सों और हेल्थ प्रोफेशनलों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में नौकरी का प्रस्ताव दिया जाएगा। इन सभी को ब्रिटेन आने के लिए फास्टट्रैक एंट्री, न्यूनतम वीजा शुल्क और समर्पित सहयोग की भी सुविधा दी जाएगी।