ब्रिक्स समूह ने अपने साझा बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग उठाई और भारत, ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरते और विकासशील देशों की आकांक्षाओं को समर्थन देने का वादा दोहराया। बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा गया कि हम सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र में समग्र सुधार का समर्थन करते हैं। यूएनएससी को ज्यादा लोकतांत्रिक, ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, प्रभावी और दक्ष बनाने के लिए इसमें सुधार करना और विकासशील देशों को इसका सदस्य बनाना जरूरी है। ऐसा करने से यह वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया दे पाएगा। साथ ही दक्षिण अफ्रीका, भारत और ब्राजील जैसे अफ्रीका, एशिया व लैटिन अमेरिका के देशों की अंतरराष्ट्रीय विषयों पर ज्यादा बड़ी भूमिका निभाने में मदद कर पाएगा।
ब्रिक्स ने बयान में किसी के भी द्वारा, कहीं भी अंजाम दिए गए हर तरह के आतंकवाद कड़ी निंदा की गई है। इसमें कहा गया है, हम आतंकवाद और कट्टरवाद को मदद देने वाले उग्रवाद के खतरे को पहचानते हैं। हम आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, उसके वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित पनाहगाहों सहित आतंक के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या नस्ल से न जोड़े जाने की बात भी कही गई। ब्रिक्स देशों ने दुनिया के सामने गंभीर खतरा बने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संतुलित और समग्र भूमिका निभाने पर जोर दिया है। परोक्ष रूप से पाकिस्तान जैसे देशों को निशाने पर रखते हुए साझा बयान में आतंकवाद के दोहरे मानदंडों को खारिज किया गया।
मोदी-जिनपिंग में नहीं हुई द्विपक्षीय बैठक
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने भी ब्रिक्स सम्मेलन की जानकारी दी। हालांकि, पीएम मोदी के चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग को आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। समझा जाता है कि मोदी और जिनपिंग के बीच कोई निर्धारित द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई। पीएम मोदी और जिनपिंग को सम्मेलन के मंच की तरफ कुछ देर बातचीत करते देखा गया।
ब्रिक्स प्लस डायलॉग में राष्ट्रपति ने किया संबोधित