ब्रिक्स में एकजुटता पर भी उठे सवाल
देखा जाए तो
ब्रिक्स में इंडोनेशिया, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और यूएई जैसे नए सदस्य भी शामिल हो गए हैं। इसके अलावा बेलारूस, क्यूबा और वियतनाम जैसे 10 रणनीतिक साझेदार भी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतने सारे नए सदस्य होने के बावजूद BRICS खुद को एक मजबूत वैश्विक नेतृत्व के रूप में पेश नहीं कर पा रहा है। कई देशों के नेता नहीं आए, जिससे इसकी एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
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इतना ही नहीं सम्मेलन के दौरान कई विरोध प्रदर्शन भी हुए। एक संगठन ने ईरान में LGBTQ+ लोगों के खिलाफ भेदभाव के विरोध में समुद्र तट पर इंद्रधनुषी झंडे लगाए। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ब्राजील के अमेजन में तेल ड्रिलिंग योजना का विरोध किया। गौरतलब है कि इस सबके बावजूद राष्ट्रपति लूला के लिए यह सम्मेलन घरेलू राजनीतिक संकट और लोकप्रियता में गिरावट के बीच राहत का मौका बना। उन्होंने पर्यावरण और जलवायु पर भी बातचीत आगे बढ़ाई, जो नवंबर में अमेजन के शहर बेलें में होने वाली COP30 बैठक के लिए अहम है।