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ब्रेक्जिट से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को नुकसान तय, लोगों पर होगा ये असर

Thu, 28 Mar 2019 04:59 PM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, लंदन
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ब्रेक्जिट
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ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के एलान के बाद से वहां की संसद में लगातार गतिरोध बना हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि यदि तय समय सीमा में कोई फैसला नहीं होता है तो ब्रिटेन बिना किसी समझौते के यूरोपीय यूनियन से बाहर हो जाएगा। हालांकि यूरोपीय यूनियन ने इसके लिए टेरेसा मे को 22 मई तक का समय दे दिया है। इससे पहले यह समयसीमा 29 मार्च थी।
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यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क पहले ही कह चुके हैं कि ब्रिटिश सरकार के पास अब भी सौदा करने या न करने के अलावा अनुच्छेद 50 को रद्द करने के विकल्प खुले हुए हैं। ब्रेक्जिट मसौदा प्रस्ताव को ब्रिटेन की सांसद दो बार नकार चुके हैं। 

क्या है हॉर्ड और सॉफ्ट ब्रेक्जिट

ब्रिटेन के बिना किसी समझौते के यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलने को हार्ड ब्रेक्जिट नाम दिया गया है। जबकि यदि समझौता हो जाता है तो इसे सॉफ्ट ब्रेक्जिट कहा जाएगा। हॉर्ड की तुलना में सॉफ्ट ब्रेक्जिट से लोगों को कम नुकसान झेलना होगा।

ब्रेक्जिट

क्या है ब्रेक्जिट?

28 देशों की सदस्यता वाले यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर हो जाने को ब्रेक्जिट कहा जा रहा है। इसे दुनिया में ब्रेक्जिट का नाम दिया गया है। जो ब्रिटेन और एक्जिट दो शब्दों से मिलकर बना है। इस मुद्दे पर ब्रिटेन में पहला जनमत संग्रह 23 जून, 2016 को हुआ था। इसमें अधिकतर लोगों ने संघ से अलग होने के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद टेरीजा मे प्रधानमंत्री बनीं। अब ब्रिटेन 29 मार्च 2019 को यूरोपियन संघ से अलग होगा, लेकिन अगर संघ के सभी सदस्य इससे सहमत नहीं होते तो ये टल भी सकता है। 

ये होगा असर

ब्रिटेन के इस फैसले का असर न केवल ब्रिटेन पर बल्कि भारत सहित दुनिया के बाकी देशों पर भी पड़ेगा। अगर ब्रिटेन यूरोपियन संघ से अलग हो जाता है तो पौंड गिर जाएगा जिससे डॉलर की मांग बढ़ेगी। इससे पेट्रोल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी। वहीं भारत सबसे अधिक इसलिए प्रभावित होगा क्योंकि यूरोपियन संघ भारत के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। भारत के आईटी सेक्टर की 16-18 फीसदी कमाई ब्रिटेन से ही होती है। 

इसके अलावा एक दूसरा असर पड़ेगा लोगों की यात्राओं पर। यूरोपियन यूनियन में शामिल देश के नागरिक बिना वीजा के यूरोप के किसी भी देश में बेरोकटोक घूम सकते हैं। लेकिन इससे अलग होने के बाद ब्रिटेन के लोगों को यूरोप के देशों में यात्रा करने के लिए वीजा की आवश्यकता पड़ेगी। इसका सीधा असर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान झेलना पड़ा सकता है।

कैसे होगा ब्रेक्जिट?

ब्रेक्जिट
ये किसी को नहीं पता है कि ब्रेक्जिट कैसे होगा। साधारण शब्दों में कहें तो, जनमत संग्रह के ढाई साल बाद भी सांसद ये तय नहीं कर पाएं हैं कि इसके नतीजे का क्या करें। ये इतना ही सरल है और इसी से पता चलता है कि ब्रिटेन 1954 के बाद के सबसे बड़े राजनीतिक संकट में कैसे घिर रहा है लेकिन अगर कुछ नहीं हुआ तो इसका मतलब ये है कि ब्रिटेन को बिना समझौते के ही यूरोपीय संघ से अलग होना पड़ेगा।

और अगर अंत में टेरीजा मे बिना समझौते के यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए तैयार न हो पाईं और अगर संसद इसे रोकने के लिए आतुर रही तो फिर किसी को नहीं पता कि क्या होगा। कुछ तो होगा, लेकिन क्या होगा, ये कहना अभी मुश्किल है।

मुख्य विपक्षी पार्टी में क्या चल रहा है?

ब्रेक्जिट ने न सिर्फ सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी में मतभेद पैदा किए हैं बल्कि मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी में भी दरार डाल दी है। यूरोपीय संघ के विरोधी जेरेमी कोर्बिन की छाया में पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह से यूरोपीय संघ से अलग होना चाहता है लेकिन पार्टी के अधिकतर सदस्य और समर्थक चाहते हैं कि दोबारा जनमत संग्रह हो और ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग होने से रोका जाए।
 
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ब्रेक्जिट पर बैर्टेल्समन फाउंडेशन की रिपोर्ट

जर्मनी के बैर्टेल्समन फाउंडेशन द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि ब्रेक्जिट के कारण ब्रिटेन को वार्षित 67 अरब यूरो का नुकसान होगा। इसके उलट अमेरिका जैसे देशों को इसका फायदा मिलेगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना समझौते के ईयू से बाहर होने पर ब्रिटेन में वस्तु और सेवाओं पर टैक्स लगेगा जो इस समय एकल बाजार व्यवस्था होने के कारण नहीं लग रहा है।

इससे वस्तु और सेवाएं महंगी होगी और लोगों के खर्च भी बढ़ेंगे जबकि आय में कमी होने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे ब्रिटेन के लोगों की आय को लगभग 57 अरब यूरो का नुकसान होगा। जिसका भार ब्रिटेनवासियों पर प्रति व्यक्ति 873 यानि लगभग 67 हजार रुपए पड़ेगा।

अगर ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग होता है तो ईयू में सदस्य देशों की संख्या 27 होगी। यूरोपीय महाद्वीप में कुल 50 देश हैं जिनमें से कई देश अभी भी यूरोपीय संघ के सदस्य नहीं हैं
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