ब्रिटेन की संसद में ब्रेक्जिट समझौते पर मंगलवार को हुए ऐतिहासिक मतदान में प्रधानमंत्री टेरीजा मे को करारी हार का सामना करना पड़ा है। समझौते के पक्ष में 202 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। इसी के साथ यूरोपीय संघ के साथ ब्रेक्जिट को लेकर किया गया समझौता भी रद्द हो गया। ब्रेक्जिट के लिये 29 मार्च की तारीख तय थी।
वहीं अगर संसद में मौजूद भारतीय मूल के सांसदों की बात करें तो अधिकतर ने पीएम टेरिजा मे के खिलाफ वोट डाला है। इन सांसदों में से सात लेबर पार्टी के हैं और बाकी के तीन सत्तारूढ़ पार्टी के हैं। वहीं दो सासंदों ने पीएम के हक में वोट डाला है। संसद के रिकॉर्ड के अनुसार इनके नाम आलोक शर्मा और ऋषी सुनक है।
शर्मा रोजगार विभाग में राज्यमंत्री हैं और सुनक हाउसिंग, कम्युनिटी एंड लोकल गवर्नमेंट में जूनियर मिनिस्टर। बता दें सुनक इन्फोसिस के को फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति के दामाद हैं। वहीं सत्तारूढ़ पार्टी के वो तीन भारतीय मूल के सांसद जिन्होंने पीएम के खिलाफ में वोट डाला है, उनके नाम हैं प्रीती पटेल, शैलेश वरा और सुएला ब्रेवरमेन। वरा और ब्रेवरमेन ने बीते साल नवंबर में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने समझौते के पब्लिश होने के बाद ये कदम उठाया।
लेबर पार्टी के वरिष्ठ सांसद वीरेंद्र शर्मा ने वोटिंग के नतीजों के बाद कहा, "इस शाम ये साबित हुआ है कि संसद में पीएम के लिए कोई बहुमत नहीं है और ब्रेक्जिट के लिए कोई भी डील नहीं है।"