Brazil President Election- Jair Bolsonaro and leftist front-runner Luiz Inacio Lula da Silva
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ब्राजील के मतदाता नया राष्ट्रपति चुनने के लिए रविवार को मतदान करेंगे। इस चुनाव में मतदाताओं का जैसा ध्रुवीकरण देखने को मिला है, वैसा पहले संभवतया कभी नहीं हुआ। इसके अलावा इस चुनाव में गहरी अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी भी पैदा हुई है। राष्ट्रपति चुनाव में वैसे तो लगभग दर्जन भर उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो और मशहूर वामपंथी नेता और पूर्व राष्ट्रपति लुई इनेशियो लूला दा सिल्वा के बीच है। दोनों उम्मीदवारों ने सीधे जनता के बीच जाने के अलावा सोशल मीडिया और टेलीविजन बहसों के जरिए भी जोरदार प्रचार किया है।
जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक लूला को पहले चरण के मतदान में 48 फीसदी वोट मिलने की संभावना है। जबकि बोल्सोनारो को 31 फीसदी वोट मिल सकते हैं। अगर पहले दौर के मतदान में किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी से अधिक वोट नहीं मिले, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच अगले 30 अक्तूबर को दूसरे दौर के मतदान में मुकाबला होगा। चुनाव नतीजों के इंतजार के साथ-साथ देश में हिंसा का अंदेशा भी गहराया हुआ है। जनमत सर्वेक्षणों में 67 फीसदी लोगों ने आशंका जताई कि उन्हें अपने राजनीतिक विचारों के कारण हिंसा का शिकार बनना पड़ सकता है। बोल्सोनारो ने चुनाव नतीजों को स्वीकार ना करने का संकेत बार-बार देकर माहौल को और भी अनिश्चित बना दिया है। बोल्सोनारो ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का विरोध किया है और दावा किया है कि इन मशीनों में धांधली हो सकती है।
इन बयानों के कारण बोल्सोनारो को ‘ब्राजील का ट्रंप’ कहा गया है। लिबरल पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ रहे मौजूदा राष्ट्रपति की पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यह तुलना इसीलिए की गई है कि ट्रंप ने 2020 के चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। बोल्सोनारो ने अपने चुनाव अभियान में अभिव्यक्ति की आजादी, जीने की आजादी, और देश के संसाधनों का उपयोग करने की आजादी को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने ‘आत्म रक्षा’ के लिए लोगों को बंदूक रखने का अधिकार देने की बात भी कही है।
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि पहले कार्यकाल में राष्ट्रपति के रूप में बोल्सोनारो का रिकॉर्ड उनके लिए सबसे ज्यादा नुकसान का पहलू बना हुआ है। कोविड-19 महामारी को संभालने के उनकी सरकार के तौर-तरीकों की दुनिया भर में आलोचना हुई थी। पहले उन्होंने कोविड को खतरनाक रोग मानने से इनकार किया और फिर काफी समय तक वैक्सीन का विरोध करते रहे। इस बीच 21 करोड़ आबादी वाले इस देश में लगभग सात लाख लोग कोरोना संक्रमण के कारण मर गए।
लूला 2003 से 2011 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैँ। उन्होंने अपना चुनाव प्रचार अपने पहले दो कार्यकाल की उपलब्धियों को आधार बनाते हुए चलाया है। उस दौर में करोडों को लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया था। लूला सरकार की जन कल्याणकारी योजनाएं तब बहुत लोकप्रिय थीं। ब्राजील में कोई व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल से अधिक राष्ट्रपति नहीं रह सकता। 2011 में जब लूला रिटायर हुए, तब उनकी एप्रूवल रेटिंग (उनके काम से संतुष्ट लोगों की संख्या) 90 प्रतिशत थी।
लूला ने पिछले दिनों एक चुनाव सभा में कहा- ‘मुझे आपसे कोई वादा करने की जरूरत नहीं है। आठ साल के पिछले शासनकाल में मेरी नीतियों का आपने समर्थन किया था। उन नीतियों से इस देश में हर सेक्टर को लाभ पहुंचा था।’