Brazil President Election- Jair Bolsonaro and leftist front-runner Luiz Inacio Lula da Silva
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ब्राजील के चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो अपनी सियासी ताकत दिखाने में कामयाब रहे। उन्हें इससे काफी ज्यादा वोट मिले, जितना जनमत सर्वेक्षणों और मीडिया विश्लेषणों में अनुमान लगाया गया था। बोल्सोनारो को 43 फीसदी से अधिक वोट मिले। उधर लूला नाम से मशहूर उनके प्रतिद्वंद्वी वामपंथी नेता लुई इनेसियो लूला दा सिल्वा 50 फीसदी मत से डेढ़ फीसदी पीछे रह गए। इस तरह राष्ट्रपति चुनाव का फैसला अब दूसरे चरण के मतदान में होगा। दूसरे चरण के लिए वोट अगले 30 अक्तूबर को डाले जाएंगे।
तमाम जनमत सर्वेक्षणों में बोल्सोनारो को 30 से 33 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया था। एक सर्वे में कहा गया था कि 52 फीसदी वोट हासिल कर पूर्व राष्ट्रपति लूला पहले ही चरण में जीत जाएंगे। बाकी सर्वेक्षणों में भी लूला को 48 से 50 फीसदी वोट मिलने का अंदाजा लगाया गया था। अंतिम चुनाव नतीजे में लूला को तो लगभग इतने वोट मिले, लेकिन बोल्सोनारो ने सबको चौंकाते हुए 43 फीसदी से ज्यादा मत हासिल कर लिया।
राष्ट्रपति चुनाव के साथ ब्राजील की संसद और प्रांतों में गवर्नर और विधायिकाओं के लिए भी मतदान हुआ था। संसद के ऊपरी सदन सीनेट के लिए आते नतीजों से भी लूला की वर्कर्स पार्टी को झटका लगा। जबकि बोल्सोनारो समर्थक कई धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवारों को इसमें सफलता मिली है। निचले सदन कांग्रेस का चुनाव अगले एक या दो दिन में साफ होगा।
विश्लेषकों के मुताबिक मैदान में मौजूद अन्य उम्मीदवारों को जो वोट मिलने का अंदाजा लगाया गया था, उसका ज्यादा हिस्सा बोल्सोनारो ने हासिल कर लिया। इससे बाकी उम्मीदवार लगभग अप्रासंगिक हो गए। रविवार सुबह एक सैनिक स्थल पर अपना वोट डालने के बाद बोल्सोनारो ने कहा- ‘बीते 45 दिन में मैंने ब्राजील के सभी राज्यों का दौरा किया है। मैं आज जीतने की उम्मीद कर रहा हूं।’ लेकिन तब उनकी इस टिप्पणी को लोगों ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया।
विश्लेषकों के मुताबिक अब दूसरे दौर के मतदान में तमाम संभावनाएं खुल गई हैं। बोल्सोनारो बाकी उम्मीदवारों को मिले लगभग 9 फीसदी वोटों का ज्यादा हिस्सा हासिल करने में सफल रहे, तो वे जीत भी सकते हैं। जानकारों के मुताबिक अगर वे नहीं जीते, तभी इस नतीजे ने साबित कर दिया है कि ब्राजील में धुर दक्षिणपंथ का जन समर्थन मजबूत बना हुआ है।
बोल्सोनारो रूढ़िवादी विचारों वाली लिबरल पार्टी के उम्मीदवार हैं। मीडिया टिप्पणियों में अनुमान लगाया गया था कि कोरोना महामारी को संभालने में नाकामी के कारण 67 वर्षीय बोल्सोनारो बहुत अलोकप्रिय हो गए हैं। इसके अलावा उनकी लोकतंत्र, मानवाधिकार और समलैंगिक अधिकार विरोधी कथित रुख को लेकर भी नाराजगी मौजूद होने की बात कही गई थी। बोल्सोनारो ये चुनाव खनन बढ़ाने, सार्वजनिक कंपनियों का निजीकरण करने और अधिक अक्षय ऊर्जा उत्पादित करने के वादे पर लड़ रहे हैं।
लूला 2003 से 2011 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। तब अपनी जन कल्याणकारी योजनाओं और करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने में सफलता के कारण लूला बेहद लोकप्रिय हुए थे। ब्राजील में कोई व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल तक ही राष्ट्रपति रह सकता है। इसलिए 2011 में लूला को अपना पद छोड़ना पड़ा था।