फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दान में मिले हाथों से बेसबॉल खेलने वाला लड़का

Thu, 20 Jul 2017 05:38 PM IST
बीबीसी हिन्दी
विज्ञापन
दुनिया का पहला बच्चा बन गया है जिसके दोनों हाथ प्रत्यारोपित किए गए हैं.
विज्ञापन
एक अमरीकी लड़का दुनिया का पहला बच्चा बन गया है जिसके दोनों हाथ प्रत्यारोपित किए गए हैं। प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि अब वह बच्चा बेसबॉल बैट आसानी से घूमा रहा है। 10 बरस के ज़ायन हार्वे को नए हाथ मिले हैं और उसके हौंसले को नई उड़ान।
विज्ञापन


हाथ प्रत्यारोपित करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि यह विस्मित करने वाला है। ज़ायन अब लिख सकता है। खा सकता है, ख़ुद से कपड़े बदल सकता है और बैट भी पकड़ सकता है। ज़ायन को हाथ एक डोनर से मिला है।

मेडिकल जांच से साबित हुआ है कि ज़ायन के मस्तिष्क ने उस हाथ को अपने हाथ की तरह स्वीकार किया है। फिलाडेल्फिया के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में ज़ायन का इलाज चला था। डॉक्टर सांद्रा अमराल ज़ायन का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम में शामिल थे उन्होंने बीबीसी से कहा कि ज़ायन की स्थिति में लगातार तेज़ी से सुधार हो रहा है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा, "वह अब बैट घुमा सकता है और अपना नाम भी लिख पा रहा है। उसकी अनुभूति में लगातार सुधार हो रहा है और यह हमारे लिए विस्मित करने वाला है। अब वह अपने मां के गाल पर हाथ से थपकी दे सकता है।"

डॉक्टर अमराल ने कहा, "यह सबूत है कि उसके मस्तिष्क ने नए हाथों को स्वीकार कर लिया है।" डॉक्टरों की टीम ने इस अभूतपूर्व कामयाब कहानी का 'मेडिकल नोट्स द लैन्सेंट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल' में छापा है।
विज्ञापन

CHILDREN'S HOSPITAL OF PHILADELPHIA
ज़ायन का जन्म दोनों हाथों के साथ हुआ था, लेकिन जब वह दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे। ज़ायन के ही शब्दों में, "जब मैं दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे क्योंकि मैं बीमार था।" ज़ायन को जानलेवा इन्फ़ेक्शन हो गया था। डॉक्टरों को ज़ायन के दोनों हाथ काटने पड़े थे।


ज़ायन की किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था। दो साल डायलिसिस पर रहने के बाद चार साल की उम्र में ज़ायन की किडनी का प्रत्यारोपण हुआ। किडनी ज़ायन की मां से ली गई थी। इसके चार साल बाद ज़ायन को नया हाथ मिला।


ज़ायन के हाथ की सर्जरी जून 2015 में की गई थी। यह अपने आप में एक बड़ा जोखिम था। हालांकि दोनों हाथों का प्रत्यारोपण की ये पहली घटना नहीं थी। इससे पहले 1998 में भी हुआ था। यह सबसे कम उम्र में किया गया प्रत्यारोपण है। डॉक्टरों का कहना है ज़ायन उनके लिए मिसाल की तरह है।


जिनमें नए अंगों का प्रत्यारोपण किया जाता है। उन्हें जीवन भर एंटी-रिजेक्शन दवाई खानी पड़ती है। और इन दवाइयों का बुरा साइड इफेक्ट होता है। इसका मतलब यह हुआ कि सर्जरी पर जोखिम का साया हमेशा बना रहता है। ज़ायन किडनी के लिए दवाई पहले से ही खा रहा है। 18 महीने बाद इसका मूल्यांकन किया जाएगा। हालांकि ज़ायन के मामले में मेडिकल टीम आश्वस्त है कि उसे इसका फ़ायदा होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें