Blinken Beijing Visit: Antony J. Blinken with Wang Yi
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की चीन यात्रा की तैयारी पूरी गंभीरता के साथ की जा रही है। इसके लिए अमेरिका और चीन के अधिकारियों के बीच निकट संपर्क बना हुआ है। दोनों देशों के अधिकारी ब्लिंकन की बीजिंग यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। ब्लिंकन अगले साल के आरंभ में चीन जाएंगे। इस बारे में घोषणा इंडोनेशिया के बाली में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पहली निजी मुलाकात के बाद हुई थी। दोनों राष्ट्रपति जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने बाली गए थे।
ब्लिंकन और शी जिनपिंग के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार संपर्क में बने रहना चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों ने मीडियाकर्मियों को बताया है कि ब्लिंकन की यात्रा के दौरान मुख्य जोर ऐसे उपायों पर होगा, जिससे दोनों देशों के बीच दुर्घटनावश कोई बड़ा टकराव ना हो जाए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक चीन और अमेरिका दोनों ब्लिंकन की अगली बीजिंग यात्रा को बेहद अहम मान रहे हैं।
इस यात्रा की तैयारी में अभी अमेरिका पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के सहायक विदेश मंत्री डैनियल क्रिटेनब्रिंक चीन यात्रा पर हैँ। उनके साथ अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में चीन और ताइवान विभाग की वरिष्ठ निदेशक लाउरा रोजेनबर्ग भी बीजिंग गई हैं। यहां सरकारी तौर पर बताया गया है कि क्रिटेनब्रिंक और रोजेनबर्ग बाइडन-शी बातचीत में बनी सहमति को और आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। उनकी यात्रा शुरू होने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों अधिकारी अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा को जिम्मेदारी से संभालने और सहयोग के संभावित क्षेत्रों का पता लगाने पर बातचीत करेंगे।
बीजिंग में रविवार और सोमवार को क्रिटेनब्रिंक और रोजेनबर्ग के साथ चीन के उप विदेश मंत्री शिये फेंग की बातचीत हुई। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के संवेदनशील मुद्दों को ठीक से संभालने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। क्रिटेनब्रिंक और रोजेनबर्ग बीजिंग के बाद दक्षिण कोरिया और जापान जाएंगे। वहां भी बातचीत का प्रमुख मुद्दा चीन से जुड़े मसले होंगे। इसके अलावा उत्तर कोरिया से जुड़े विवाद पर भी वहां वार्ता होगी।
विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका यूक्रेन पर रूस के हमले के खिलाफ पश्चिमी प्रतिक्रिया में चीन को भी शामिल करने को इच्छुक है। वह चाहता है कि यूक्रेन में टकराव और न बढ़ाने के लिए रूस पर दबाव डालने की कोशिश में चीन शामिल हो। अमेरिका ने चीन को संदेश भेजा है कि रूस को यह समझाया जाना चाहिए कि वह पश्चिमी देशों को इस युद्ध में सीधे नहीं उलझने के लिए मजबूर ना करे।
अमेरिकी विश्लेषकों के मुताबिक इस समय चीन का ध्यान उसकी धीमी होती अर्थव्यवस्था पर है। अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश में ही वह लगातार जीरो-कोविड की अपनी नीति को नरम कर रहा है। साथ ही वह चाहता है कि अमेरिकी कंपनियों के चीन में कारोबार करने की राह में बाइडन प्रशासन रुकावट ना डाले। समझा जाता है कि दोनों तरफ ऐसी इच्छाओं के कारण ब्लिंकेन की यात्रा के दौरान कोई महत्त्वपूर्ण सहमति बन सकती है।