कांगो के पूर्वी हिस्से में हिंसा एक बार फिर खौफनाक रूप में सामने आई है। दक्षिण किवू प्रांत के सेंगे शहर में सेना और एक सरकारी समर्थक मिलिशिया के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बम विस्फोट में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई है जब हाल ही में वॉशिंगटन में शांति समझौते पर दस्तखत किए गए थे और इसे कांगो में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया गया था।
स्थानीय लोगों और सिविल सोसाइटी के नेताओं ने बताया कि कांगो की सेना FARDC और वाजालेंदो मिलिशिया के बीच झड़पें विस्फोट से ठीक पहले शुरू हो गई थीं। वाजालेंदो मिलिशिया सेना के साथ मिलकर विद्रोहियों से लड़ता रहा है, लेकिन दोनों पक्षों में रविवार शाम अचानक तनाव बढ़ गया। बताया गया कि सेना का एक दल मोर्चे से उविरा शहर की ओर बढ़ रहा था, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इसी विवाद के दौरान गोलियां चलीं और फिर जोरदार धमाका हुआ, जिसमें भारी जनहानि हुई।
खदानों वाले क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा संघर्ष
कांगो का यह पूर्वी इलाका खनिजों से भरपूर है और यहां 100 से ज्यादा सशस्त्र समूह सक्रिय हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम रवांडा समर्थित M23 समूह का है। लगातार होते संघर्ष की वजह से यहां 70 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं। यह धमाका उस समझौते के कुछ ही दिनों बाद हुआ है जिसे अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार किया गया था ताकि FARDC और M23 के बीच चल रही लड़ाई को रोका जा सके। इसके बावजूद जमीनी हालात में कोई सुधार नहीं दिख रहा।
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मौके पर दहशत, लोग घर छोड़कर भागे
धमाके के बाद सेंगे और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने रातोंरात अपना घर छोड़ दिया और सुरक्षा के लिए बुुरुंडी की ओर भागना शुरू कर दिया। एक निवासी अमानी सफारी ने कहा कि सुबह माहौल थोड़ा शांत दिखा, लेकिन डर अभी भी कायम है। उन्होंने बताया कि सुबह साढ़े सात बजे फिर से FARDC और वाजालेंदो के बीच झड़प हुई और इसमें दो सैनिक मारे गए।
कौन दुश्मन है, कौन सेना, पता ही नहीं चलता
कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि यह पहचानना मुश्किल है कि कौन विद्रोही है और कौन सेना का जवान। लोगों ने सरकार से युद्ध खत्म करने की मांग की। दाविद कसरोरे नाम के एक निवासी ने कहा कि नागरिक सबसे ज्यादा मारे जा रहे हैं और अब लोगों का सब्र जवाब दे चुका है। सेना ने इस घटना पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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राष्ट्रपति ने शांति समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया
कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्शीसेकेदी ने संसद में कहा कि रवांडा ने समझौते का उल्लंघन किया है और कांगो के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि शांति समझौते के अगले ही दिन रवांडन डिफेंस फोर्सेज ने भारी हथियारों से हमला किया, जिससे बड़े पैमाने पर जन और संपत्ति का नुकसान हुआ। उन्होंने इसे “प्रॉक्सी के जरिए हमला” बताया और आंतरिक विद्रोह के दावों को खारिज किया।
समझौते के बावजूद हिंसा जारी
हालात यह हैं कि पिछले हफ्ते भी दक्षिण किवू में लड़ाई और तेज हो गई। FARDC और M23 एक-दूसरे पर संघर्ष विराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। इस साल M23 ने पूर्वी कांगो के दो बड़े शहर—गोमा और बुकावू—पर कब्जा कर लिया था। संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों का कहना है कि M23 को रवांडा के लगभग 4,000 सैनिकों का समर्थन मिला हुआ है और विद्रोही कभी-कभी राजधानी किंशासा तक मार्च करने की धमकी भी देते हैं। लगातार बढ़ती हिंसा कांगो के लिए गंभीर मानवीय संकट बन चुकी है।
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