बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार कुछ मामलों में तटस्थ नहीं रह सकी। वह निष्पक्षता रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाए। फखरुल ने कहा कि यदि अंतरिम सरकार निष्पक्ष नहीं रह सकती तो देश में चुनाव के दौरान तटस्थ सरकार की आवश्यकता होगी।
बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) ने अंतरिम सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार कुछ मामलों में तटस्थ नहीं रह सकी। वह निष्पक्षता रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाए। फखरुल ने कहा कि यदि अंतरिम सरकार निष्पक्ष नहीं रह सकती तो देश में चुनाव के दौरान तटस्थ सरकार की आवश्यकता होगी। इस बयान के पीछे एक कारण है। हमने देखा है कि अंतरिम सरकार कई मुद्दों पर तटस्थता बनाए रखने में असमर्थ है।
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उन्होंने अंतरिम सरकार से अपनी जिम्मेदारियों को निष्पक्षता से निभाने और देश के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने का आग्रह किया। फखरुल ने कहा कि अंतरिम सरकार को देश में आवश्यक सुधार करने के बाद यथाशीघ्र चुनाव कराना चाहिए। चुनाव के माध्यम से गठित सरकार जनता से की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने तथा जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए काम करने में सक्षम होगी।
उन्होंने कहा कि यदि चुनाव में देरी हुई तो बुरी ताकतें देश की स्थिति का फायदा उठा सकती हैं। सभी राजनीतिक दल चुनाव कराने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रणाली का प्रवेश द्वार है। कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार को सुधारों के बाद ही चुनाव कराने चाहिए। तो क्या हमें चार से पांच साल तक इंतजार करना चाहिए या सुधारों के पूरा होने तक?
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बीएनपी ने जुलाई या अगस्त में चुनाव कराने की थी मांग
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की तरफ से इस साल जुलाई या अगस्त तक आम चुनाव कराने की मांग की थी। वहीं पिछले महीने मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा था कि देश में अगला आम चुनाव 2025 के अंत या 2026 की पहली छमाही में हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि चुनाव का समय काफी हद तक राजनीतिक सहमति और उससे पहले किए जाने वाले सुधारों की सीमा पर निर्भर करेगा।
आरक्षण के खिलाफ आंदोलन के चलते गई थी शेख हसीना की सरकार
बांग्लादेश में 5 जून को हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले से नौकरियों में 30% कोटा सिस्टम लागू किया था। इस कोटे का लाभ बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों के परिजनों को दिया जाना था। इसके खिलाफ ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे ये विरोध प्रदर्शन की आग पूरे देश में फैल गई और लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों के दबाव में आरक्षण खत्म कर दिया गया, लेकिन फिर प्रदर्शनकारी शेख हसीना के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए। इसके चलते हिंसा इतनी बढ़ी कि शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा और उन्होंने भारत में शरण ली। इसके बाद सेना ने देश की कमान संभाल ली। बाद में एक अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को उसका मुख्य सलाहकार बनाया गया।