अब रक्तदान से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा अनिवार्य। दवाओं और ब्लड बैंकों का सिंगल डाटाबेस बनेगा ब्लड बैंकों पर सख्ती की तैयारी में डीसीसी ने सिफारिश की है कि पूरे देश के लिए दवाओं और ब्लड बैंकों का सिंगल डाटाबेस बनाने की पहल हो। नई व्यवस्था लागू होने पर क्या बदलेगा? जानिए इस खबर में
केंद्रीय औषधि परामर्श समिति (डीसीसी) ने लाइसेंसी ब्लड सेंटरों का ई-रक्तकोष पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य करने और रक्तदान करने वालों के आधार बेस्ड बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की है। इसके लिए एक अलग विशेषज्ञ उप समिति बनाने का भी सुझाव दिया गया है। साथ ही बिना मंजूरी बिक रही दवाओं की पहचान कर उनके लाइसेंस रद्द करने तथा उन्हें बाजार से हटाने की भी बात कही गई है।
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पैसे लेकर रक्तदान करने वालों पर नकेल कैसे?
डीसीसी की 69वीं बैठक में रक्तदान की प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर ये सिफारिशें की गई हैं। अभी कुछ ब्लड बैंक अपने स्तर पर उपरोक्त प्रक्रियाएं अपना रहे हैं। एक समान नियम बनने से पूरे देश में पारदर्शी सिस्टम बनेगा। इससे सुनिश्चित होगा कि एक व्यक्ति अलग-अलग पहचान बताकर बार-बार रक्तदान नहीं कर पाएगा। पैसे लेकर रक्तदान करने वालों पर भी रोक लगेगी।
बैंकों में रक्तदाताओं का रिकॉर्ड रहेगा
यही नहीं किसी रक्त यूनिट में बाद में कोई संक्रमण या अन्य समस्या सामने आती है तो यह पता लगाना आसान होगा कि वह रक्त किसने दान किया था। इससे जरूरत पड़ने पर आगे की जांच और कार्रवाई तेज हो सकेगी। ई-रक्तकोष से जुड़े ब्लड बैंकों में रक्तदाताओं का रिकॉर्ड रहेगा। इससे पता चलेगा कि व्यक्ति ने हाल में कहां और कब रक्तदान किया है।
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बगैर स्वीकृत दवाओं के लाइसेंस होंगे रद्द
समिति ने यह भी माना कि देश में कुछ ऐसी दवाएं बिक रहीं, जिन्हें नियामकीय मंजूरी नहीं मिली है। इस कारण ऐसे उत्पादों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। समिति ने सुझाव दिया है कि जो दवाएं सीडीएससीओ की स्वीकृत सूची में नहीं हैं और भारतीय फार्माकोपिया के मानकों में भी शामिल नहीं हैं, उन्हें अनधिकृत माना जा सकता है। ऐसी दवाओं के लाइसेंस रद्द कर उन्हें बाजार से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। डीसीसी ने देशभर में स्वीकृत दवाओं का सिंगल डाटाबेस तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी सिफारिश की है।