अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि इस्राइल ने गाजा में संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई के लिए प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। उन्होंने हमास से भी इसे स्वीकार करने का आह्वान किया। ब्लिंकन ने कहा, इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ चली ढाई घंटे की बैठक काफी सकारात्मक रही। उन्होंने प्रस्ताव के आधार पर दोनों पक्षों से समझौते पर पहुंचने का आग्रह किया। हालांकि, ब्लिंकन ने ब्रिजिंग प्रस्ताव को लेकर नेतन्याहू के रुख को स्पष्ट नहीं किया है। इसमें इस्राइल की ओर से गाजा के भीतर दो रणनीतिक गलियारों पर नियंत्रण की मांग की गई है। हमास के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच अन्य पेचीदा मुद्दों के बीच यह मसला गंभीर बना हुआ है। इसके चलते कई शांति वार्ताएं बाधित हो चुकी हैं।
ब्लिंकन ने सोमवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बैठक से पूर्व राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। टाइम्स ऑफ इस्राइल के अनुसार, हर्जोग ने ब्लिंकन के साथ मुलाकात के दौरान समझौता वार्ता न हो पाने के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने ईरान की धमकियों के बीच क्षेत्र में शक्ति संतुलन के प्रयासों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का आभार जताया। उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका के लिए अमेरिका, मिस्र व कतर का आभार जताते हुए वार्ता की सफलता की उम्मीद जताई। इससे पहले ब्लिंकन ने संवाददाताओं से कहा, यह एक निर्णायक क्षण है... संभवतः सबसे अच्छा। शायद बंधकों को घर वापस लाने, युद्ध विराम कराने व सभी को स्थायी शांति तथा सुरक्षा के बेहतर रास्ते पर लाने का आखिरी अवसर। बता दें कि अमेरिकी प्रस्ताव के आधार पर मिस्र में इसी हफ्ते वार्ता फिर से शुरू हो सकती है।
इसलिए अटकी है वार्ता
इस्राइल व हमास के बीच युद्धविराम को लेकर अमेरिकी अगुवाई में महीनों से वार्ता चल रही है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी मांगों पर अड़े हैं। इस्राइल का कहना है कि युद्ध का अंत सिर्फ हमास के खात्मे के साथ ही हो सकता है। दूसरी तरफ, हमास का कहना है कि वह सिर्फ स्थायी युद्धविराम ही स्वीकार करेगा।
इस्राइल की सुरक्षा की जताई प्रतिबद्धता
इस्राइल दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि 'यह 7 अक्तूबर के बाद से इस क्षेत्र में उनका नौवां दौरा है। हम इस्राइल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। अप्रैल में जब ईरान ने इस्राइल पर हमला किया था, उस वक्त भी हमने इस्राइल की मदद की थी। हाल के हफ्तों में तनाव बहुत बढ़ गया है। इसलिए हमने अतिरिक्त बलों की तैनाती की है। इस तैनाती का उद्देश्य भड़काऊ नहीं है बल्कि यह हालाक को संभालने के उद्देश्य से है। हम ये सुनिश्चित करेंगे कि हालात न बिगड़ें। हालांकि साथ ही ये भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम इस्राइल की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हम कूटनीतिक तरीके से विभिन्न देशों के साथ बात कर रहे हैं ताकि कोई भी देश ऐसा कदम न उठाए कि उससे संघर्ष बढ़ जाए। हमारी प्राथमिकता संघर्ष को बढ़ने से रोकने की है।'