जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में भी इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। ब्रिटेन में प्रदर्शनकारियों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रणेता और पूरी दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले महात्मा गांधी की पार्लियामेंट स्क्वॉयर में स्थित प्रतिमा के आस-पास रंगभेदी संदेश लिए पोस्टर चिपका दिए और प्रतिमा के चबूतरे पर रेसिस्ट (नस्लभेदी) लिख दिया।
साल 2015 में स्थापित की गई महात्मा गांधी की यह प्रतिमा पार्लियामेंट स्क्वायर में मौजूद प्रमुख ब्रिटिश, राष्ट्रमंडल और विदेशी राजनीतिक हस्तियों जैसे अब्राहम लिंकन, नेल्सन मंडेला और विंस्टन चर्चिल जैसे लोगों की 12 प्रतिमाओं में से एक है। प्रदर्शनकारियों ने चर्चिल की प्रतिमा को भी निशाना बनाया और उनकी प्रतिमा के नीचे 'नस्लभेदी थे' लिख दिया।
ब्लैक लाइव्स मैटर ( Black Lives Matter ) आंदोलन ने दक्षिण-पश्चिमी इंग्लैंड के ब्रिस्टल में चिंगारी भड़काने का काम किया है। ब्रिस्टल में लंबे समय तक दास प्रथा चलती रही थी। 17वीं शताब्दी के एक स्थानीय दास व्यापारी एडवर्ड कोल्सटन की साल 1895 में यहां स्थापित की गई एक प्रतिमा को प्रदर्शनकारियों ने गिरा दिया और एवन नदी में फेंक दिया।
प्रदर्शनकारियों के इस कार्य को लेबर पार्टी के सांसदों ने समर्थन दिया, जबकि कई पुलिसकर्मी लंदन में प्रदर्शन के दौरान घायल हो गए। ब्रिटेन की गृहमंत्री प्रीति पटेल ने ब्रिस्टन में हुई कोल्स्टन की प्रतिमा गिराने की इस घटना को पूरी तरह से अपमानजनक करार दिया है, जिसके बाद से उनकी खूब आलोचना हो रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पूर्व चांसलर साजिद जाविद ने कहा, 'मैं ब्रिस्टल में बड़ा हुआ हूं। मैं जानता हूं कि एडवर्ड कोल्स्टन ने दास व्यापास से खूब लाभ कमाया। लेकिन, यह ठीक नहीं है। अगर ब्रिस्टल के नागरिक किसी स्मारक को हटाना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए लोकतांत्रिक तरीका अपनाना चाहिए न कि अपराधियों की तरह ऐसा करना चाहिए।'
वहीं प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ट्वीट किया, 'लोगों को शांतिपूर्वक और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन उनके पास पुलिस पर हमला करने का अधिकार नहीं है। ये प्रदर्शन उस लक्ष्य से कहीं दूर हैं जो इनका मकसद होना चाहिए था। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।'