पाकिस्तान से आजादी मांग रही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान के सुराब शहर पर हमला किया। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक हमले में एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई। बीएलए के लड़ाकों ने एक वाणिज्यिक बैंक को लूट लिया। साथ ही कई अफसरों के घर में आग लगा दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीएलए ने दावा किया है कि उसने सुराब शहर पर कब्जा कर लिया। उन्होंने एक बैंक, लेवी स्टेशन और पुलिस स्टेशन पर कब्जे का दावा किया। क्वेटा-कराची और सुराब -गिदर राजमार्ग पर गश्त की जा रही है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने कहा कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के सशस्त्र हमलावरों ने खुजदार जिले के सुराब शहर पर हमला किया। उन्होंने एक वाणिज्यिक बैंक को लूट लिया। हमलावरों ने अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) हिदायत बुलेदी के घर पर हमला किया। इसमें हिदायत बुलेदी की मौत हो गई। घटना के बाद फ्रंटियर कोर, पुलिस और लेवी सहित सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया। क्वेटा के कमिश्नर हमजा शफकत ने भी डिप्टी कमिश्नर बुलेदी की मौत की पुष्टि की।
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बीएलए ने ली बलूचिस्तान में 39 हमलों की जिम्मेदारी
इससे पहले बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान में 39 अलग-अलग जगहों पर समन्वित हमले करने की जिम्मेदारी ली थी। बीएलए ने दावा किया था कि उन्होंने कुछ पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है और क्षेत्र की प्रमुख सड़कों पर नाकाबंदी कर दी है। बलूचिस्तान में लंबे समय से आजादी की मांग करने वाले अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं। कई वर्षों से चल रहे संघर्ष के कारण यहां बहुत से लोग मारे गए हैं। इसके अलावा, इन संघर्षों के चलते बहुत लोग विस्थापित भी हुए हैं।
बलूच लोगों की आजादी चाहता है बीएलए
दरअसल, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित एक हथियारबंद अलगाववादी समूह है, जो बलूच लोगों के लिए आजादी चाहता है। बीएलए का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार बलूच लोगों के साथ अन्याय कर रही है। उनके राजनीतिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उनके इलाकों के प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस और खनिज का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, उन्हें इसका कोई फायदा नहीं दिया जा रहा। आर्थिक शोषण और सैन्य दमन पर लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के जवाब में बीएलए उभरा है।
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पाकिस्तान का सबसे गरीब इलाका है बलूचिस्तान
बलूचिस्तान के पास गैस, खनिज और तटीय संपत्तियों जैसे प्राकृतिक संसाधन हैं, फिर भी यह पाकिस्तान का सबसे गरीब और सबसे अविकसित इलाका है। ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों का कहना है कि यहां पिछले कुछ सालों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों द्वारा हजारों बलूच कार्यकर्ताओं, छात्रों, पत्रकारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अगवा कर उनकी हत्या कर दी गई है। सरकार इन पीड़ितों को अक्सर 'आतंकवादी' या 'विदेशी एजेंट' कहती है, जबकि परिवारों को कोई जवाब या कानूनी सहारा नहीं दिया जाता है। विभिन्न जिलों में सामूहिक कब्रें मिली हैं, जिससे लोगों में और डर और गुस्सा बढ़ गया है।