अमेरिका में पक्षियों का पलायन: क्या शहरों की रोशनी बन रही जानलेवा; कैसे बचेंगे करोड़ों प्रवासी परिंदे?
Tue, 15 Sep 2026 05:46 AM IST
निर्मल कांत
द न्यूयॉर्क टाइम्स/ईशानी देसाई, शिकागो/न्यूयॉर्क।
सार
अमेरिका में करीब 50 करोड़ प्रवासी पक्षियों का पलायन शुरू हो चुका है। इन पक्षियों के लिए कांच की इमारतें और तेज रोशनी बड़ा खतरा बन रही हैं। इसी वजह से लोगों से रात में गैर-जरूरी लाइटें बंद रखने की अपील की गई है। पढ़िए रिपोर्ट।
पतझड़ की शुरुआत के साथ ही उत्तरी गोलार्ध से दक्षिण अमेरिका के गर्म इलाकों की ओर दुनिया का सबसे बड़ा परिंदों का पलायन शुरू हो चुका है। आने वाले दो हफ्तों में करीब 50 करोड़ (हाफ बिलियन) प्रवासी पक्षी भोजन और अनुकूल मौसम की तलाश में हजारों मील की दूरी तय करते हुए अमेरिकी आसमान से गुजरेंगे।
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ब्लैकपॉल वॉर्बलर, चिमनी स्विफ्ट और सिज़र-टेल्ड फ्लाईकैचर जैसी सैकड़ों दुर्लभ प्रजातियों के लाखों झुंड रात के अंधेरे में उड़ रहे हैं। लेकिन इस सफर में परिंदों के सामने सबसे बड़ा शिकारी कोई बाज या बिल्ली नहीं, बल्कि आधुनिक शहरों की चमचमाती गगनचुंबी इमारतें और उनकी तेज कृत्रिम रोशनी बन चुकी हैं।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के 'बर्डकास्ट' प्रोजेक्ट के अनुसार, हर साल दुनिया भर में 100 करोड़ से अधिक पक्षी कांच की खिड़कियों और रोशन इमारतों से टकराकर दम तोड़ देते हैं। इस सामूहिक संहार को रोकने के लिए शिकागो, मिनियापोलिस और न्यूयॉर्क जैसे दर्जनों अमेरिकी महानगरों में नागरिकों से रात 11 से सुबह 6 बजे तक गैर-जरूरी बाहरी लाइटें और फ्लडलाइट्स बंद रखने की अपील की गई है। ताकि रोशनी के भ्रम में फंसकर परिंदे कंक्रीट की दीवारों से न टकराएं। अधिकांश प्रवासी पक्षी तारों और प्राकृतिक रोशनी के सहारे रात में उड़ान भरते हैं। जब वे बड़े शहरों के ऊपर से गुजरते हैं, तो गगनचुंबी इमारतों की तेज चकाचौंध उन्हें भटका देती है और वे रोशनी की ओर खिंचे चले आते हैं।