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जो बाइडेन : सबसे युवा सीनेटर से सबसे उम्रदराज अमेरिकी राष्ट्रपति बनने का सफर

Sun, 08 Nov 2020 12:34 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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जो बाइडन - फोटो : Twitter@JoeBiden
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अमेरिकी राजनीति में करीब पांच दशकों से सक्रिय जो बाइडन ने सबसे युवा सीनेटर से लेकर सबसे उम्रदराज अमेरिकी राष्ट्रपति बनने तक का शानदार सफर तय करके शनिवार को इतिहास रच दिया। 77 वर्षीय बाइडन छह बार सीनेटर रहे और अब अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हराकर देश के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि यह कामयाबी उन्होंने अपने पहले प्रयास में पा ली है। बाइडन को वर्ष 1988 और 2008 में राष्ट्रपति पद की दौड़ में नाकामी मिली थी।

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राष्ट्रपति बनने का सपना संजोये डेलावेयर से आने वाले दिग्गज नेता बाइडन को सबसे बडी सफलता उस समय मिली जब वह दक्षिण कैरोलीना की डेमोक्रेटिक पार्टी प्राइमरी में 29 फरवरी को अपने सभी प्रतिद्वंद्वी को पछाड़कर राष्ट्रपति पद की दौड में जगह बनाने में कामयाब रहे। वाशिंगटन में पांच दशक गुजारने वाले बाइडन अमेरिकी जनता के लिए एक जाना-पहचाना चेहरा थे क्योंकि वह दो बार तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में उप राष्ट्रपति रहे।


74 वर्षीय ट्रंप को हराकर व्हाइट हाउस में जगह पाने वाले बाइडन अमेरिकी इतिहास में अब तक के सबसे अधिक उम्र के राष्ट्रपति बन गए हैं। आइए हम आपको बताते हैं बाइडन के राजनीतिक करियर और उनकी जिंदगी के संघर्षों के बारे में...
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डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन का राजनीतिक करियर काफी लंबा रहा है। बाइडन 78 साल की उम्र में अमेरिका के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं।



पूर्व डेलावेयर सीनेटर जो बाइडन को 2008 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में 47वें अमेरिकी उपराष्ट्रपति चुना गया था और 2012 में फिर से निर्वाचित किया गया। इसके बाद वह 2020 में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में बढ़त बनाए हुए हैं।

कौन हैं जो बाइडन?
जो बाइडन यानी जोसेफ रॉबिनेट बाइडन जूनियर का जन्म साल 1942 में पेनसिल्वेनिया राज्य के स्क्रैंटन में हुआ था। वह अपने बचपन में ही डेलावेयर चले गए थे। जो बाइडन ने राजनीति में आने से पहले कुछ दिनों तक एक वकील के रूप में काम किया। वह इतिहास में पांचवे सबसे कम उम्र के अमेरिकी सीनेटर और डेलावेयर के सीनेटर के रूप में सबसे लंबे समय तक सेवारत रह चुके हैं।

राष्ट्रपति चुनाव की रेस में पहले भी उतर चुके हैं बाइडन
डेलावेयर से छह बार सीनेटर रह चुके बाइडन राष्ट्रपति चुनाव की रेस में तीसरी बार उतरे हैं। उन्होंने पहली कोशिश 1988 के चुनाव में की थी, हालांकि तब उन्हें साहित्यिक चोरी के आरोप में पीछे हटना पड़ा था। फिर उन्होंने अपनी दूसरी कोशिश 2008 के चुनाव के लिए की।


बाइडन को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का करीबी माना जाना है। वह ओबामा के कार्यकाल में 2008 से 2016 तक दो बार उपराष्ट्रपति भी रह चुके हैं। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में बाइडन की जीत के लिए ओबामा भी काफी जोर लगाते दिखे हैं।

 2017 में ओबामा ने अपने प्रशासन के करीबी जो बाइडन को राष्ट्रपति पद के लिए प्रस्तुत किया। दो साल बाद बाइडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए अपना अभियान शुरू किया और 2020 के डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं।

पारिवारिक मुश्किलों के साथ लड़कर इस मुकाम पर पहुंचे बाइडन
1972 में बाइडन सीनेट के लिए चुने गए सबसे कम उम्र के लोगों में से एक थे। कुछ ही हफ्तों बाद, बाइडन के परिवार में एक त्रासदी हुई, जब एक कार एक्सीडेंट में उनकी पत्नी नीलिया और बेटी नाओमी की मौत हो गई, जबकि उनके बेटे हंटर और ब्यू गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

बाइडन अपने बेटों को देखने के लिए विलमिंगटन और वॉशिंगटन डीसी के बीच रोजाना एमट्रैक ट्रेन से सफर करते थे। जिसके बाद वह 'एमट्रैक जो' नाम से लोकप्रिय हो गए थे। पांच साल तक, बाइडन ने अपनी बहन वैलेरी और उनके परिवार की मदद से ब्यू और हंटर को सिंगल फादर के तौर पर पाला था।

साल 2015 में 46 साल की उम्र में बाइडन के बड़े बेटे ब्यू की ब्रेन कैंसर से मौत हो गई। बाइडन के छोटे बेटे हंटर की बात करें तो एक वकील और लॉबिस्ट के रूप में उनका करियर भ्रष्टाचार के आरोपों का निशाना रहा है। पत्नी नीलिया की मौत के पांच साल बाद बाइडेन ने जिल से शादी की। उनकी एश्ली नाम की एक बेटी है, जिसका जन्म 1981 में हुआ था।

बाइडन की प्राथमिकताएं क्या हैं?
बाइडन की तीन बड़ी प्राथिमकताएं हैं जिनमें हेल्थ केयर से जुड़े ढांचे का विस्तार करना, शिक्षा में ज्यादा निवेश करना और सहयोगी देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देना शामिल है।

भारत को लेकर क्या है रुख?
भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए बाइडन ने कहा था कि अगर वह राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं तो भारत के सामने मौजूद खतरों से निपटने में उसके साथ खड़े रहेंगे।

बाइडन ने कहा था कि ‘मैं 15 साल पहले भारत के साथ ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते को मंजूरी देने की कोशिशों की अगुवाई कर रहा था। मैंने कहा कि अगर भारत और अमेरिका करीबी दोस्त और सहयोगी बनते हैं, तो दुनिया ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी।’ उन्होंने यह भी कहा था कि वह दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर काम करेंगे।

विवादों से रहा है नाता
बाइडन पर ब्रिटिश लेबर पार्टी के नील किन्नॉक के भाषण की साहित्यिक चोरी का आरोप लगा था। इसके अलावा बाइडन ने स्वीकार किया था कि उन्होंने लॉ स्कूल में अपने पहले साल के दौरान कानून की समीक्षा का लेख चोरी किया था।

यौन उत्पीड़न का भी लगा था आरोप
बाइडन के सीनेट ऑफिस में काम करने वाली एक महिला ने वॉशिंगटन डीसी की पुलिस के पास एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने इस शिकायत में आरोप लगाए थे कि बाइडन ने 1993 में उनका यौन उत्पीड़न किया था।

2007 में गोली लगने का किया था दावा, फिर अपने बयान से पलट गए थे
साल 2007 में बाइडन ने दावा किया था कि उन्हें इराक के ग्रीन जोन में गोली लगी थी, लेकिन बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि वह उस जगह के पास थे जहां ‘गोली चली’ थी।

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