अमेरिका के सीनेटरों ने देश के नागरिकों और कंपनियों के खिलाफ चीनी सेंसरशिप और धमकी देने वाली उसकी रणनीतियों के असर से निपटने के लिए एक विधेयक अमेरिकी संसद में पेश किया है। इस विधेयक में चीन की अन्य देशों पर सेंसरशिप और धमकियों पर भी नजर रखने का प्रस्ताव है।
इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से एक चीनी सेंसरशिप निगरानी एवं कार्य समूह स्थापित करने को कहा गया है, ताकि अमेरिकियों और अमेरिकी कंपनियों पर चीनी खतरे के प्रभावों को बेहतर तरीके से समझने और उनसे निपटने की रणनीति के क्रियान्वयन में मदद मिल सके।
सीनेट में विदेशी संबंध समिति के सदस्य जेफ मार्कले के अलावा सांसद मार्को रुबियो, एजिलाबेथ वारेन और जॉन कार्निन ने यह विधेयक पेश किया। विधेयक में चीनी रणनीति और उसके अमेरिका पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी के लिए एक अनुसंधान संगठन या संघ द्वारा वित्त पोषित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की बात की गई है। मार्कले ने कहा, यह विधेयक इसलिए जरूरी है ताकि हम अपनी आजादी की रक्षा करने की रणनीति बना सकें।
जिनपिंग ने की चीन के पूर्णत: गरीबी मुक्त होने की घोषणा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की है कि उनके देश ने पिछले चार दशक में 77 करोड़ से ज्यादा लोगों का आर्थिक स्तर सुधारकर गरीबी के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह से जीत ली है। उन्होंने इसे एक चमत्कार बताया जो 2030 के लक्ष्य से 10 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया।
उन्होंने कहा, 1.4 अरब आबादी वाले चीन से गरीबी का पूरी तरह उन्मूलन हो गया है। शी ने कहा, 2012 में सत्ता संभालने के बाद से गांवों में रह रहे अंतिम 9.89 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।
कई देशों में हथियारों की पहुंच बढ़ा रहा चीन
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के डाटा में बताया गया है कि चीन ने कई देशों में हथियारों की पहुंच बहुत तेजी से बढ़ाई है। 2010 से 2014 के बीच उसने 40 देशों में हथियार बेचे जबकि 2015 से 2019 के बीच यह वृद्धि 53 अन्य देशों में हुई।
इस हिसाब से चीन वर्तमान में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को हथियार बेचना बंद करने के बाद चीन ने उसे आपूर्ति शुरू की। चीन के लिए पाक सबसे बड़ा हथियार खरीदार है। जबकि चीन ने म्यांमार, अफ्रीका, मध्य-पूर्वी देशों के हथियार बाजार में भी बढ़त बनाई है।