गर्मियों की एक दोपहर मैनहट्टन के एक कॉन्फ्रेंस हॉल में करीब 200 शिक्षक जुटे थे। मंच पर माइक्रोसॉफ्ट की टीम थी, जो शिक्षकों को अपना एआई चैटबॉट को-पायलट इस्तेमाल करना सिखा रही थी। इसमें पेरेंट्स को ईमेल लिखना व बच्चों को नए तरीकों से एआई समझाना शामिल था।
यह नजारा देखकर वर्षों हेल्थकेयर कवर करने वाली वरिष्ठ पत्रकार नताशा सिंगर को वो मॉडल याद आ गया, जिसके जरिये फार्मा कंपनियां डॉक्टरों को महंगे सेमिनार में आमंत्रित करके और गिफ्ट देकर अपनी ब्रांडेड दवाएं मरीजों को लिखने के लिए तैयार करती हैं। नताशा सिंगर की नई किताब कोडिंग किड्स: बिग टेक्स बैटल टू रीमेक पब्लिक स्कूल्स में यह खुलासा हुआ है कि कैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल और ओपनएआई जैसी कंपनियों ने अमेरिकी शिक्षा प्रणाली की पूरी सप्लाई चेन पर कब्जा जमा लिया है। वर्कशॉप के अगले ही दिन 18 लाख सदस्यों वाली अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स ने देशभर के शिक्षकों को एआई ट्रेनिंग देने के लिए माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई और एंथ्रोपिक से 2.3 करोड़ डॉलर (करीब 2000 करोड़ रुपये) की पार्टनरशिप का ऐलान किया।
स्कूलों की सप्लाई चेन पर कब्जा किया
शुरुआत में गूगल ने जीमेल और डॉक्स जैसे एप्स स्कूलों को बिल्कुल मुफ्त दिए। इसके बाद सस्ते क्रोमबुक बेचे। आज अमेरिकी स्कूलों में सप्लाई होने वाले कुल गैजेट्स में 59% हिस्सेदारी अकेले क्रोमबुक की है। मकसद साफ था, बचपन से ही छात्रों को अपने इकोसिस्टम का आदी बनाना, ताकि बड़े होकर वे जिंदगी भर के लिए कंपनी के डाटा और विज्ञापनों के उपभोक्ता बन जाएं।
उत्पाद के हिसाब से सिलेबस तैयार कराया
- एपल हाई स्कूल छात्रों के लिए मुफ्त कंप्यूटर साइंस कोर्स चलाता है, जिसमें सिर्फ एपल की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज स्विफ्ट सिखाई जाती है ताकि वे आईफोन एप्स बनाएं।
- वहीं, माइक्रोसॉफ्ट अपने गेम माइनक्राफ्ट एजुकेशन के जरिए कोर्स चलाता है। जानकारों का सवाल है कि टेक कंपनियों को यह खुली छूट क्यों है?
कोडिंग बूम से एआई तक
- 2013 में बिल गेट्स और मार्क जुकरबर्ग ने वीडियो जारी कर दावा किया कि देश में सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की भारी कमी है।
- स्कूलों पर दबाव डालकर कोडिंग अनिवार्य कराई गई। लेकिन जैसे ही एआई ने खुद कोड लिखना शुरू कर दिया, टेक कंपनियों ने हजारों इंजीनियर्स की छंटनी कर दी।
- अब वही संस्थाएं कोड डॉट ओआरजी का नाम बदलकर कोडएआई कर चुकी हैं और स्कूलों में चैटबॉट्स झोंक रही हैं।