थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा को शाही मानहानि मामले में बड़ी राहत मिली है। पूर्व पीएम शिनावात्रा ने कहा कि शुक्रवार को एक अदालत ने उन्हें मानहानि के मामले में बरी कर दिया। उनके वकील विन्यात चैटमोंट्री ने भी बरी किये जाने के फैसले की पुष्टि की।
76 वर्षीय थाकसिन मुस्कुराते हुए अदालत कक्ष से बाहर निकले और उन्होंने सबसे पहले फैसला सुनाया तथा पत्रकारों के सवालों का जवाब एक ही शब्द में दिया कि खारिज। अदालत ने कहा कि गवाह और साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए बहुत कमजोर थे। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्षात्कार का विवरण अधूरा था और उसमें संदर्भ का अभाव था। एक मुख्य बिंदु में तत्कालीन राजा भूमिबोल अदुल्यादेज का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया था।
अदालत ने कहा कि थाकसिन के खिलाफ मामले में गवाह राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित हो सकते हैं, क्योंकि उन्होंने उनके खिलाफ राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था। जिससे यह संभावना बनी हुई है कि उन्होंने उनके शब्दों की गलत व्याख्या की होगी।
पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा पर थाईलैंड की राजशाही को बदनाम करने के आरोप में औपचारिक रूप से केस दर्ज कराया गया था। जो देश की राजनीति को अस्थिर करने वाले कई अदालती मामलों में से एक है। थाकसिन पर मूल रूप से 2016 में लेसे मैजेस्टे कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था, क्योंकि उन्होंने एक साल पहले दक्षिण कोरिया के सियोल में पत्रकारों से बात करते हुए टिप्पणी की थी। हालांकि थाकसिन ने आरोपों से इनकार किया था और खुद का बचाव करते हुए एक बयान जारी किया था।
थाईलैंड में 'लेसे मैजेस्टे' कानून के तहत हुआ था मुकदमा
थाईलैंड में राजतंत्र को बदनाम करने के लिए बनाए गए कानून के तहत किसी भी शख्स को तीन से 15 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इस कानून को 'लेसे मैजेस्टे' के नाम से जाना जाता है और ये दुनिया के इस तरह के सबसे कठोर कानूनों में से एक है। इसी कानून के उल्लंघन के आरोप में थाकसिन पर केस दर्ज कराया गया था।
18 साल पहले थाईलैंड की राजनीति से बेदखल किए पूर्व प्रधानमंत्री थकसिन शिनावात्रा आज भी देश में एक प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती है। दरअसल थकसिन शिनावात्रा को थाईलैंड का सबसे सफल चुना हुआ नेता माना जाता है। तख्तापलट के जरिए सत्ता से बाहर किए जाने के बाद उनपर प्रतिबंध भी लगाया गया था। वहीं थाकसिन ने पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया था।
साल 2008 में लगा था भ्रष्टाचार का आरोप
दो बार थाईलैंड के प्रधानमंत्री रह चुके थाकसिन एक अरबपति नेता हैं, जो अक्सर विवादों में घिरे रहते हैं। थाकसिन ने साल 2001 से 2006 तक थाईलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। हालांकि, साल 2006 के सैन्य तख्तापलट में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था। साल 2008 में थाकसिन पर भ्रष्टाचार और सत्ता के पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद वह थाईलैंड छोड़कर भाग गए थे और करीब 15 साल के आत्म-निर्वासन बाद, पिछले साल अगस्त में वापस अपने देश आ गए, जिसके बाद उन्हें उनके आरोपों के लिए सजा सुनाई गई।
उन्होंने अपनी सजा का पूरा समय पुलिस के अस्पताल में बिताया, जिसके बाद विरोधियों ने उन पर विशेषाधिकार होने का भी आरोप लगाया है। थाकसिन को अगस्त 2023 में भ्रष्टाचार के आरोप में आठ साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद ही थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न ने शाही माफी दे दी, जिसके बाद उनकी सजा आठ साल से घटाकर एक साल कर दी गई थी।
बेटी पैतोंगतार्न भी मुश्किल में
थाकसिन की बेटी और पीएम पैतोंगतार्न शिनावात्रा भी मुश्किल में हैं। उन पर 15 जून को कंबोडियाई सीनेट के अध्यक्ष हुन सेन के साथ हुई बातचीत को नैतिक रूप से न संभालने का आरोप है। इसमें उन्होंने दोनों देशों द्वारा दावा किए गए क्षेत्र को लेकर तनाव पर चर्चा की थी। सांविधानिक न्यायालय ने एक जुलाई को उन्हें उनके कर्तव्यों से निलंबित कर दिया था और अगले हफ्ते फैसला सुनाया जाएगा कि नैतिकता संबंधी कानूनों का उल्लंघन करने के कारण उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाया जाएगा या नहीं।