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बड़ा सवाल : कोरोना वायरस की वजह से सबसे ज्यादा मौतें धनी देशों में क्यों हुईं?

Mon, 01 Feb 2021 03:01 PM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
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कोरोना महामारी के दौरान जो असामान्य बात सामने आई है, वो यह है कि इससे निपटने में सबसे धनी देश सबसे ज्यादा कमजोर साबित हुए हैं। जबकि पहले यह आम कथन था कि महामारी अगर आई तो गरीब और विकासशील देश उसे नहीं संभाल पाएंगे, जबकि धनी देश अपनी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और आर्थिक क्षमता के कारण अपने यहां ज्यादा नुकसान नहीं होने देंगे। मगर कोरोना के मामले में तजुर्बा उलटा है। 

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धनी या यूं कहें कि विकसित देशों में मृत्यु दर अपेक्षाकृत ज्यादा है। इसलिए अब विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बाकी दुनिया के साथ- साथ धनी देशों को भी अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और इकॉनमिस्ट पत्रिका से जुड़ी इकॉनमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने कोरोना महामारी आने के कुछ ही समय पहले विश्व स्वास्थ्य तैयारी रिपोर्ट जारी की थी।

इसमें महामारी से निपटने के लिहाज से हर देश की तैयारी के आधार पर उसे रैंक दी गई थी। उसमें सबसे ऊंचे पायदान पर अमेरिका को रखा गया था। लेकिन अब सच्चाई यह सामने है कि उस रैंकिंग में शामिल सिर्फ आठ देशों की कोरोना से मृत्यु दर अमेरिका की तुलना में ज्यादा है।
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तैयारी इंडेक्स में अमेरिका के बाद ब्रिटेन को रखा गया था। लेकिन ब्रिटेन में कोरोना से मृत्यु दर अमेरिका से भी खराब है। उस इंडेक्स में थाईलैंड और स्वीडन को समान पायदान पर रखा गया था। लेकिन जहां थाईलैंड में कोरोना संक्रमण के कारण हर दस लाख पर सिर्फ एक मौत हुई है, वहीं स्वीडन में ये संख्या 1,078 है।

अब विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। कुछ जानकारों का कहना है कि पहली नाकामी चीन की रही। वह बिल्कुल आरंभ में वायरस पर काबू पाने और उसकी जानकारी दुनिया को देने में नाकाम रहा।

उसके बाद की विफलता अमेरिका की अपनी है। अमेरिका ने महामारी पर काबू पाने के लिए जो कदम उठाने चाहिए थे, नहीं उठाए। अमेरिका से अपेक्षा इस मामले में दुनिया को नेतृत्व देने की भी थी, जिसमें वह पूरी तरह विफल रहा।

एक वेबसाइट के एक विश्लेषण के मुताबिक कोविड-19 वायरस का प्रसार सबसे पहले यात्रा और व्यापार के सबसे व्यस्त मार्गों पर हुआ। यह संक्रमण वृद्धों के लिए सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुआ। धनी देशों में बुजुर्ग आबादी का अनुपात बाकी दुनिया से अधिक था, इसलिए उन देशों में ये महामारी बेहद घातक होती चली गई।

अब अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन ने वादा किया है कि उनका देश फिर से विश्व स्वास्थ्य संगठन में शामिल होगा। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संगठन से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था। बाइडन ने कहा है कि अब अमेरिका वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंडे के मामले में दुनिया का नेतृत्व करेगा। वह ऐसा प्रोटोकॉल तैयार करेगा, जिससे भविष्य में कोई महामारी आने पर दुनिया भर में तालमेल बनाते हुए उससे निपटने के लिए जरूरी संसाधन लगाए जा सकें।

जानकारों की भी राय है कि मौजूदा महामारी से निपटने के लिए दुनिया को अधिक प्रयास करने की जरूरत है। साथ ही उसे ऐसी तैयारी करनी चाहिए, जिससे भविष्य में आने वाली महामारी पर आरंभ में ही काबू पा लिया जाए। जाने-माने अर्थशास्त्री एंगस डेटन ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि भविष्य में कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा मौतें गरीब देशों में हो सकती हैं, खासकर उस समय में जब धनी देशों ने अपने यहां पूरा टीकाकरण कर लिया हो।

लेकिन अभी स्थिति यही है कि कोरोना वायरस ने धनी देशों को ज्यादा चोट पहुंचाई है। विश्व स्वास्थ्य तैयारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ज्यादातर देश वैश्विक महामारी का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इस रिपोर्ट में जिन देशों को सबसे ज्यादा तैयार बताया गया था, आज सबसे ज्यादा मृत्यु दर वहीं है।

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