लगातार 12 साल से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी जब खिसकती दिख रही है, तब वे अपने उत्तराधिकारी प्रधानमंत्री के लिए मुश्किलें खड़ी करने की हर जुगत अपना रहे हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि संभवतः अपने मित्र डोनाल्ड ट्रंप से सीख लेते हुए उन्होंने नई बनने वाली सरकार की साख खत्म करने की मुहिम छेड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वैकल्पिक गठबंधन में शामिल नेताओं ने ‘सदी की सबसे बड़ी धोखाधड़ी’ की है।
खबरों के मुताबिक इस्राइल में राजनीतिक तनाव इतना अधिक बढ़ गया है कि इस्राइली संसद नैसेट के कई सदस्यों को जान से मारने की धमकी मिली है। उधर नेतन्याहू के भड़के समर्थक लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही खुफिया एजेंसियों ने देश में राजनीतिक हिंसा की चेतावनी दी है।
गौतलब है कि पिछले मार्च में दो साल के अंदर इस्राइल में चौथा आम चुनाव हुआ था। उसमें नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ा दल बन कर उभरी, लेकिन संसद में बहुमत जुटाने में वह नाकाम रही। उसके बाद नफताली बेनेट के नेतृत्व में नेतन्याहू विरोधी दलों ने गठबंधन बनाया। इस गठबंधन के साथ बहुमत है। बेनेट अब देश का अगला प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। बेनेट राजनीति में नेतन्याहू के शिष्य माने जाते रहे हैं। लेकिन हाल ही में उनकी यामिना पार्टी नेतन्याहू का साथ छोड़ दिया और विपक्षी गठबंधन में शामिल हो गई।
इससे नाराज नेतन्याहू समर्थकों ने यामिना पार्टी के नेताओं पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। उनके घरों पर प्रदर्शन किए गए हैं। इसे देखते हुए इस पार्टी के कई सांसदों की सुरक्षा सख्त कर दी गई है। नेतन्याहू ने पहले बेनेट और उनकी पार्टी को दी जा रही हिंसा की धमकियों की निंदा करने से इनकार किया था। लेकिन इस हफ्ते उन्होंने ‘सभी पक्षों’ की हिंसा की निंदा की। साथ उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार को मिल रही धमकियों को मीडिया नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि फेसबुक और ट्विटर ने उनके बेटे सहित उनके कई समर्थकों के अकाउंट सस्पेंड कर दिए हैं।
नेतन्याहू के इस बयान की तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के छह जनवरी को दिए भाषण से की गई है, जिसके बाद उनके समर्थकों ने अमेरिका के संसद भवन पर धावा बोल दिया था। इसी बयान में उन्होंने उन्होंने बेनेट और विपक्षी नेता यायर लेपिड पर इस्राइल के इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया।
नई बनने वाली सरकार में मुख्य रूप से मध्यमार्गी और दक्षिणपंथी पार्टियां शामिल होंगी। नई सरकार की पहली परीक्षा संसद में विश्वास मत के दौरान होगी। नेसेट के स्पीकर यारिव लेविन ने विश्वास मत पर वोटिंग अगले रविवार को कराने का एलान किया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसलिए अब नए गठबंधन के नेताओं के पास अपने समर्थकों की सूची तैयार करने के लिए सिर्फ एक दिन का वक्त है। शुक्रवार तक उन्हें ये सूची स्पीकर को सौंपनी होगी।
विश्लेषकों के मुताबिक अगर विपक्षी गठबंधन विश्वास मत पर मतदान में सफल हो गया, तो नए प्रधानमंत्री को रविवार को ही शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल, आकलन यही है कि बेनेट सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रवेश करेंगे। अब देखने की बात यह होगी कि अपने उत्तराधिकारी को बधाई देने की रस्म नेतन्याहू निभाते हैं या इस मामले में भी वे ट्रंप का अनुपालन करते हैं। गौरतलब है कि ट्रंप ने आज तक जो बाइडन को राष्ट्रपति बनने की बधाई नहीं दी है।