लेबनान के सीमा शुल्क अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों, सेना और न्यायपालिका पिछले छह साल में लगभग दस बार बेरुत के बंदरगाह में विस्फोटक रसायनों के जखीरे को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। लेकिन बंदरगाह पर इस खतरनाक जखीरे की सुरक्षा लगभग न के बराबर रही। हाल ही में सामने आए कुछ दस्तावेज बताते हैं कि इन चेतावनियों पर जरा भी ध्यान नहीं दिया गया।
बंदरगाह पर मंगलवार को 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट में धमाके से देश के मुख्य वाणिज्यिक केंद्र में भयानक तबाही मच गई थी। राष्ट्रपति मिचेल ने बताया कि उन्हें लगभग तीन सप्ताह पहले खतरनाक रसायन भंडार होने के बारे में जानकारी दी गई।
इसके बाद उन्होंने तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को जरूरी कार्रवाई करने के आदेश दिए। हालांकि उन्होंने माना कि बंदरगाह पर उनका कोई अधिकार नहीं है। राष्ट्रपति ने इसके लिए सत्ताधारी पार्टी के गैर-जिम्मेदाराना रवैये और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया। लेबनान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा धमाका था, जिसमें 154 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5000 से ज्यादा घायल हैं।
लेबनान ने नहीं की बेरुत धमाकों की जांच की मांग : संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र ने लेबनान सरकार के बेरुत में हुए भीषण धमाकों की जांच के लिए किसी भी तरह के आग्रह से इनकार किया। उप प्रवक्ता फुराना हक ने कहा, हम लेबनान सरकार की मदद करने को तैयार हैं, लेकिन लेबनान ने इस जांच के लिए कोई मांग नहीं की है। हक ने कहा कि फ्र ांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रौं ने इस धमाके की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग की है।