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कैंसर के दावे निपटाने को बायर का 56,000 करोड़ का प्रस्ताव, कंपनी को एक साल में करोड़ों का घाटा

Sat, 10 Aug 2019 03:38 AM IST
Avdhesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

  • बायर पर अमेरिकी अदालतों में 18,000 से ज्यादा मुकदमे लगे हैं
  • कंपनी जिन पेस्टीसाइटों को बाजार में बेच रही है वे कैंसरकारी हैं
  • पिछले साल अगस्त से लेकर अब तक 34 अरब डॉलर का घाटा हो चुका है
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विस्तार
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एनाल्जेसिक दवाएं और कॉकरोच मारने या कीटनाशक बनाने वाली कंपनी बायर एजी एक साल से कई विवादों में घिरने के बाद उनका निपटारा करने की मूड में है। दावा है कि कंपनी के उत्पादों के कारण कैंसर की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों को लेकर बायर पर अमेरिकी अदालतों में 18,000 से ज्यादा मुकदमे लगे हैं। 
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इन्हें निपटाने के लिए कंपनी ने आठ अरब डॉलर (करीब 56,000 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का प्रस्ताव रखा है। बता दें कि इस कंपनी की एस्प्रिन और एलीव या फूड सप्लीमेंट रेडॉक्सन जैसी दवाएं पूरी दुनिया में धड़ल्ले से बेची जा रही हैं।

दरअसल बायर कंपनी ने पिछले साल जर्मनी की मोंसेटो नामक कंपनी को 63 अरब डॉलर में खरीदने के बाद से ही उसके उत्पादों से कैंसर होने की शिकायतों का सामना किया। इस कारण शेयर गिरने से उसे पिछले साल अगस्त से लेकर अब तक 34 अरब डॉलर का घाटा हो चुका है। सभी मामलों में आरोप है कि कंपनी जिन पेस्टीसाइटों को बाजार में बेच रही है वे कैंसरकारी हैं। 
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कंपनी के खिलाफ अधिकांश मामले अमेरिका की प्रांतीय अदालतों में दायर किए गए हैं। कैलिफोर्निया अदालत कह चुकी  है कि मोंटेसो कंपनी को राउंडअप के साथ कथित कैंसर खतरों के बारे में चेतावनी देनी चाहिए थी। बायर के सीईओ वर्नर बाउमन ने पिछले सप्ताह कहा था कि कंपनी सिर्फ उचित शर्तों पर अमेरिकी वादियों के साथ समझौते पर विचार करेगी। लेकिन अब उसका रुख स्पष्ट है कि वह मामले खत्म करना चाहती है। 
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रोग का पता न चलने वाले लोगों की रकम को लेकर विचार जारी

बायर कंपनी ने वर्तमान और भविष्य के मामलों को निपटाने के लिए छह से आठ अरह डॉलर का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया है जबकि वादियों के वकील अपने दावे को छोड़ने के लिए 10 अरब डॉलर से ज्यादा चाहते हैं।

जानकारी के मुताबिक, जिन उपभोक्ताओं को अभी तक बीमारी का पता नहीं चला है उन्हें मुआवजा देने के लिए कितनी रकम दी जाए इस पर विचार चल रहा है जिसमें काफी वक्त लग सकता है। क्योंकि भविष्य में उन्हें रोग का पता चलने पर रकम का भुगतान करना होगा।
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