बांग्लादेशी सरकार का कहना है कि हिंसा की सिर्फ कुछ घटनाएं ही सांप्रदायिक थीं। सरकार का यह रवैया तब सामने आया है, जब वहां खुलेआम हिंदुओं समेत अल्संख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा हो रही है और इसके लिए बांग्लादेशी सरकार पूरी दुनिया के निशाने पर है।
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद जारी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के बीच मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का बेहद ही गैरजिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। बांग्लादेश सरकार ने खुद की नाकामियों पर पर्दा डालते हुए अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुए ज्यादातर हमलों को राजनीतिक करार दिया है।
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बांग्लादेसी सरकार का तर्क
मामले में बांग्लादेशी सरकार का कहना है कि हिंसा की सिर्फ कुछ घटनाएं ही सांप्रदायिक थीं। सरकार का यह रवैया तब सामने आया है, जब वहां खुलेआम हिंदुओं समेत अल्संख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा हो रही है और इसके लिए बांग्लादेशी सरकार पूरी दुनिया के निशाने पर है।
पुजारी चिन्मय दास की गिरफ्तारी
मालूम हो कि हसीना सरकार के पतन के बाद ढाका में इस्कॉन मंदिर के पुजारी चिन्मय कृष्ण दास को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और उनकी रिहाई को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बरकरार है। साथ ही बड़ी संख्या में हिंदू मंदिरों पर भी हमले हुए है।
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हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की मांग पर हुई जांच
बांग्लादेश सरकार ने एक पुलिस रिपोर्ट के हवाले से शनिवार को दावा किया कि पिछले साल 4 अगस्त के बाद से हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमले और बर्बरता की अधिकांश घटनाएं राजनीतिक थी और कुछ ही घटनाएं सांप्रदायिक थीं। पुलिस ने सांप्रदायिक हिंसा की शिकायतें सीधे प्राप्त करने और अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया है।
मुहम्मद यूनुस की प्रेस विंग ने दी जानकारी
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के प्रेस विंग ने कहा कि पुलिस ने अल्पसंख्यक समुदाय पर हुए हमलों की जांच की। यह कदम हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के हाल ही में किए गए उस दावे के बाद उठाया गया, जिसमें कहा गया था कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त को देश छोड़कर जाने के एक दिन पहले से सांप्रदायिक हिंसा की कुल 2010 घटनाएं हुईं। इस रवैये से एक बार फिर बांग्लादेशी अंतरिम सरकार दुनिया के निशाने पर है।
हिंसा की 2010 घटनाएं हुईं लेकिन सिर्फ 62 मामले दर्ज
यूनुस सरकार की प्रेस विंग ने कहा कि 4 अगस्त के बाद 1769 घटनाएं हमले और तोड़फोड़ के रूप में दर्ज की गईं। पुलिस ने अब तक दावों के आधार पर 62 मामले दर्ज किए हैं और जांच के आधार पर 35 दोषियों को गिरफ्तार किया है। सरकार का कहना है कि ज्यादातर मामलों में हमले सांप्रदायिक नहीं बल्कि राजनीतिक प्रकृति के थे। 1234 घटनाएं राजनीतिक, 20 सांप्रदायिक और कम से कम 161 दावे झूठे या फर्जी पाए गए।