अपने राष्ट्रपिता के साथ क्या कर रहा है बांग्लादेश?: मूर्ति तोड़ी, छुट्टी खत्म; अब नोट से फोटो हटाने की तैयारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sun, 08 Dec 2024 05:20 AM IST
सार
Sheikh Mujibur Rahman: बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने नए करेंसी नोटों की छपाई को मंजूरी दे दी है। नए नोटों से बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हट जाएगी। इससे पहले भी यूनुस सरकार ने मुजीबुर्रहमान से जुड़े कई फैसले किए हैं, जिनका अवामी लीग ने विरोध किया है।
बांग्लादेश
- फोटो : AMAR UJALA
बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद नई सरकार लगातार पुरानी नीतियों को बदल रही है। अंतरिम सरकार ने अब अपनी मुद्रा 'टका' को बदलने का एलान किया है। मोहम्मद यूनुस की कार्यवाहक सरकार ने नए करेंसी नोटों की छपाई को मंजूरी दे दी है। नए नोटों में अब बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर नहीं होगी। इससे पहले बंगबंधु से जुड़े राष्ट्रीय अवकाश और कई कानूनों को भी रद्द कर दिया गया था। अवामी लीग ने इन फैसलों को बांग्लादेश के इतिहास को मिटाने का प्रयास बताया है।
आइये जानते हैं कि बांग्लादेश ने अपनी मुद्रा को लेकर किस योजना की घोषणा की है? नए करेंसी नोटों में क्या बदलेगा? बदलाव की वजह क्या है? नई सरकार कैसे मुजीबुर्रहमान की 'विरासत को मिटा ' रही है?
बांग्लादेश
- फोटो : AMAR UJALA
बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद नई सरकार लगातार पुरानी नीतियों को बदल रही है। अंतरिम सरकार ने अब अपनी मुद्रा 'टका' को बदलने का एलान किया है। मोहम्मद यूनुस की कार्यवाहक सरकार ने नए करेंसी नोटों की छपाई को मंजूरी दे दी है। नए नोटों में अब बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर नहीं होगी। इससे पहले बंगबंधु से जुड़े राष्ट्रीय अवकाश और कई कानूनों को भी रद्द कर दिया गया था। अवामी लीग ने इन फैसलों को बांग्लादेश के इतिहास को मिटाने का प्रयास बताया है।
आइये जानते हैं कि बांग्लादेश ने अपनी मुद्रा को लेकर किस योजना की घोषणा की है? नए करेंसी नोटों में क्या बदलेगा? बदलाव की वजह क्या है? नई सरकार कैसे मुजीबुर्रहमान की 'विरासत को मिटा ' रही है?
बांग्लादेश ने अपनी मुद्रा को लेकर किस योजना की घोषणा की है?
आने वाले समय में बांग्लादेश नए बैंक नोटों को लॉन्च करेगा। जानकारी के अनुसार, अगले छह महीनों में 20 टका, 100 टका, 500 टका और 1,000 टका कीमत के नोट बाजार में आएंगे। बांग्लादेश बैंक ने हाल ही में इस योजना की जानकारी दी है। केंद्रीय बैंक की प्रवक्ता और कार्यकारी निदेशक हुस्ने आरा शिखा ने कहा कि सरकार अगले छह महीने में नए डिजाइन वाले करेंसी नोट छापेगी। उन्होंने स्थानीय मीडिया को बताया कि केंद्रीय बैंक को इस संबंध में सरकार की मंजूरी मिल गई है और अब आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जानी है।
नए नोटों में बदलाव क्या होगा?
मुद्रा छापने के लिए जिम्मेदार सिक्योरिटी प्रिंटिंग कॉरपोरेशन और वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नोटों की डिजाइन को नया रूप देने की तैयारी है। स्थानीय मीडिया ने केंद्रीय बैंक के सूत्रों के हवाले से बताया है कि बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर अब नए नोटों पर नहीं दिखेगी। डिजाइन में शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर के स्थान पर जुलाई में शेख हसीना के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के भित्तिचित्रों को जगह दी जाएगी। इसके साथ ही मजहबी स्थलों और पारंपरिक बंगाली रूपांकनों को भी नोट पर प्रदर्शित किया जाएगा। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नई डिजाइन समय के साथ सभी तरह के नोटों से बंगबंधु की तस्वीर को हटाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसी महीने निविदा प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही नए नोटों की छपाई शुरू हो जाएगी और अगले वर्ष जून तक इन्हें प्रचलन में लाने की योजना है।
अभी बांग्लादेश में कैसे नोट चलते हैं?
बांग्लादेश में 2 से 1,000 टका के सभी नोटों पर शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर छपी हुई है। कुछ नोटों पर दोनों तरफ उनकी तस्वीर छपी हुई है। यहां तक कि धातु के सिक्कों पर भी उनकी तस्वीर छपी हुई है। बांग्लादेश बैंक ने लोगों से कहा है कि नए नोट प्रचलन में आने के बाद भी सभी मौजूदा नोट प्रचलन में बने रहेंगे।
नई सरकार ने पहले मुजीबुर्रहमान से जुड़े क्या फैसले लिए हैं?
5 अगस्त को देश की राजधानी ढाका में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी बांग्लादेश के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान की प्रतिमा पर चढ़ गए थे और उसे अपवित्र किया था। इतना ही नहीं बल्कि प्रदर्शनों के दौरान देश भर में शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियों को तोड़ दिया गया था और उनको समर्पित संग्रहालय को आग के हवाले कर दिया गया था।
इसके बाद अक्तूबर में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना द्वारा शुरू की गई आठ राष्ट्रीय छुट्टियों को रद्द करने की घोषणा की थी। इसमें 17 मार्च और 15 अगस्त को शेख मुजीबुर्रहमान की जयंती और पुण्यतिथि के अवकाश भी शामिल थे। अंतरिम सरकार के सलाहकार नाहिद इस्लाम ने कहा था कि अंतरिम सरकार शेख मुजीबुर्रहमान को राष्ट्रपिता के रूप में मान्यता नहीं देती है।
नवंबर में बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने देश के संविधान में संशोधन करने की बात कही थी। अटॉर्नी जनरल ने संविधान से 'धर्मनिरपेक्षता', 'बंगाली राष्ट्रवाद' और 'मुजीबुर्रहमान' जैसे प्रमुख शब्दों को हटाने का सुझाव दिया था। यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश की रिपोर्ट के अनुसार असदुज्जमां ने मुजीबुर्रहमान को 'राष्ट्रपिता' के रूप में नामित करने जैसे प्रमुख प्रावधानों को हटाने का सुझाव भी दिया था। बांग्लादेश के 15वें संविधान संशोधन की वैधता पर उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की गई थी। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 30 जून 2011 को बांग्लादेश की संसद ने 15वां संशोधन पारित किया था। इसी संशोधन के जरिए शेख मुजीबुर रहमान को राष्ट्रपिता के रूप में मान्यता दी गई थी। उस वक्त देश में शेख हसीना की सरकार थी।
हाल ही में अंतरिम सरकार एक नया साइबर सुरक्षा अध्यादेश लेकर आई है। साइबर सुरक्षा अधिनियम (निरसन) अध्यादेश, 2024 में सात प्रावधानों को हटा दिया गया है। इनमें मुक्ति संग्राम, शेख मुजीबुर्रहमान, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के बारे में घृणा, गलत सूचना और अपमानजनक प्रचार से जुड़े दंड शामिल हैं।
इन तमाम फैसलों के बीच शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने अंतरिम सरकार पर हमला बोला है। अवामी लीग ने कहा कि अंतरिम सरकार बांग्लादेश के निर्माण के इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है।
कौन थे शेख मुजीबुर्रहमान?
शेख मुजीबुर्रहमान को बांग्लादेश का राष्ट्रपिता कहा जाता है और वह बांग्लादेश के निर्माता हैं। उन्हें बंगबंधु के नाम से भी जाना जाता है। 1971 में पाकिस्तान से मुक्ति के लिए हुए खूनी युद्ध के बाद बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बना था। इसके पीछे एक प्रमुख व्यक्ति शेख मुजीबुर्रहमान थे। बंगबंधु ने आजादी के बाद बांग्लादेश की पहली सरकार का नेतृत्व साढ़े तीन साल तक किया था। 15 अगस्त 1975 को सैन्य अधिकारियों के एक समूह ने शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या कर दी थी। उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, सिवाय उनकी दो बेटियों के, जो उस समय विदेश में रह रही थीं। बंगबंधु की सबसे बड़ी बेटी शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं।