बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने पर शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अवामी लीग के संगठन सचिव शफीउल आलम चौधरी नादेल ने कहा कि शेख हसीना के खिलाफ मोहम्मद यूनुस सरकार ने यह फैसला पहले से तय कर लिया था। उन्होंने यूनुस सरकार को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया। शेख हसीना को सोमवार को बांग्लादेश की अंतररराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मानवता के खिलाफ अपराध के पांच मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।
शेख हसीना की सजा पर क्या बोले अवामी लीग के नेता
एएनआई के साथ बातचीत में शफीउल चौधरी ने कहा कि 'शेख हसीना हमारी प्रधानमंत्री हैं, अवामी लीग की अध्यक्ष हैं और हमारे राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं। अवैध, असंवैधानिक, फासीवादी यूनुस सरकार ने शेख हसीना के खिलाफ पहले से ही तय फैसला सुनाया है। बीते 15 वर्षों में हमारी प्रधानमंत्री और अवामी लीग ने लोगों और देश की भलाई के लिए काम किया। आठ करोड़ लोगों को सीधे या परोक्ष रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा था। यूनुस एक फासीवादी, हत्यारे और अपराधी है और बांग्लादेश में सभी कट्टरवादियों का समर्थन कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 के बाद से सबकुछ राजनीतिक प्रतिशोध के चलते किया जा रहा है। वहां कोई कानून व्यवस्था नहीं है और सब कुछ असंवैधानिक तौर पर हो रहा है।
भारत की तारीफ की
अवामी लीग के नेता ने भारत की तारीफ की और भारत को महान देश बताया, जिसने लोगों को शरण दी। उन्होंने कहा कि शेख हसीना भारत की विश्वसनीय सहयोगी हैं। हम अपने तरीके से विरोध करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने लॉकडाउन बुलाया और शटडाउन भी किया। हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं कि यह फैसला अवैध फैसला है। वहीं अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के सजा सुनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए शेख हसीना ने कहा कि मैं डरने वाली नहीं हूं। मुझ पर लगे सभी आरोप झूठे हैं और फर्जी अदालत ने मेरे खिलाफ सजा का एलान किया है।
ये भी पढ़ें- Sheikh Hasina Extradition: शेख हसीना को नहीं सौंपेगा भारत, वह दो आधार...जिनके कारण नहीं हो सकता प्रत्यर्पण
जमात ए इस्लामी ने फैसले की तारीफ की
शेख हसीना को सजा सुनाए जाने के बाद बांग्लादेश जमात ए इस्लामी पार्टी ने फैसले पर संतोष जाहिर किया। पार्टी ने ये भी कहा कि शेख हसीना के खिलाफ चला मुकदमा अंतरराष्ट्रीय मानकों का था, जबकि शेख हसीना के समय जमात नेताओं के खिलाफ चलाए गए मुकदमे अंतरराष्ट्रीय मानकों के नहीं थे। जमात ने कहा कि मुकदमा पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्तर का था।