अल्पसंख्यकों और हिंदुओं पर हमले के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि वो अन्य देशों के साथ समानता के आधार पर भारत से भी अच्छे संबंध चाहता है। बता दें कि, जुलाई-अगस्त महीने से बांग्लादेश तमाम अस्थिरताओं के बीच अतंरिम सरकार के भरोसे चल रही है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शनिवार को कहा कि वह भारत समेत सभी देशों के साथ पारस्परिक सम्मान और समानता पर आधारित मजबूत संबंध चाहती है। 'ढाका ट्रिब्यून' अखबार की खबर के अनुसार, विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने नरसिंगडी के रायपुरा और बेलाबो उपजिलों में अधिकारियों, पत्रकारों, नेताओं और बुद्धिजीवियों के साथ दो अलग-अलग बैठकों के दौरान ये टिप्पणियां कीं।
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'बांग्लादेश ने भारत से अच्छे संबंधों की इच्छा जताई'
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने भारत को संदेश भेजा है, जिसमें अच्छे संबंधों की इच्छा जताई गई है, लेकिन यह आपसी हितों पर आधारित होना चाहिए। मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश सभी देशों के साथ सम्मान और समानता के आधार पर अच्छे संबंध चाहता है तथा सरकार इस लक्ष्य की ओर काम कर रही है।
'सुधारों के बाद राजनीतिक निर्वाचित नेताओं को मिलेगी सत्ता'
मोहम्मद तौहीद हुसैन ने अंतरिम सरकार की निष्पक्ष शासन व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया, जिसमें छात्रों समेत जनता की चिंताओं को दूर करना और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुधारों को लागू करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के बाद राजनीतिक सत्ता निर्वाचित नेताओं को हस्तांतरित हो जाएगी।
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बांग्लादेश में बढ़े अल्पसंख्यकों पर हमले
बता दें कि, बांग्लादेश में जुलाई महीने में हिंसा और अगस्त महीने में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद फिलहाल अंतरिम सरकार शासन क रही है। इस सरकार के प्रमुख नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस है। वहीं हाल ही में अंतरिम सरकार ने स्वीकार किया है कि, शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमले के 88 मामले दर्ज किए गए हैं।
दोनों देशों के संबंधों में तनाव
हालिया हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों और हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद दोनों देशों के संबंध और भी तनावपूर्ण हो गए। त्रिपुरा के अगरतला में बांग्लादेश उप उच्चायोग में प्रदर्शनकारियों के जबरन घुसने के मामले पर भी दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा। पिछले कुछ हफ्तों में पड़ोसी देश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के साथ-साथ मंदिरों पर हमले हुए हैं। भारत ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है।