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Bangladesh: बांग्लादेश में PM कार्यालय, पुलिस की वेबसाइट हैक; संदेश लिखा- 'स्टॉप किलिंग स्टूडेंट्स’

Tue, 23 Jul 2024 03:55 AM IST
विशांत श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

बांग्लादेश में हो रहे हिंसक प्रदर्शन बीच प्रधानमंत्री कार्यालय, सेंट्रल बैंक और पुलिस की आधिकारिक वेबसाइटें हैंक हो गईं। इसके बाद तीनों ही वेबासाइटों पर एक ही तरह का मैसेज देखने को मिला , जिसमें लिखा था- "ऑपरेशन हंटडाउन, स्टॉप किलिंग स्टूडेंट्स’’
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hacker - फोटो : FREEPIK
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विस्तार
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बांग्लादेश में नौकरी में आरक्षण को लेकर फैली अशांति के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय, सेंट्रल बैंक और पुलिस की आधिकारिक वेबसाइटें हैंक हो गई हैं।  "द R3SISTANC3" नामक एक समूह द्वारा साइट हैक करने का दावा किया जा रहा है। 

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तीनों साइटों पर एक जैसा संदेश दिखा, जिसमें लिखा था, "ऑपरेशन हंटडाउन, स्टॉप किलिंग स्टूडेंट्स’’  

संदेश में आगे लिखा गया, "हमारे बहादुर छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को सरकार और उसके राजनीतिक साथियों द्वारा क्रूर हिंसा और हत्या का सामना करना पड़ा है। यह अब केवल विरोध नहीं है बल्कि यह न्याय, स्वतंत्रता और हमारे भविष्य के लिए एक युद्ध है।"  

आरक्षण में बदलाव की मांग के बाद हिंसक प्रदर्शन
बांग्लादेश में आरक्षण में बदलाव की मांग कर रहे छात्रों की तरफ से बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है। लेकिन ये विरोध-प्रदर्शन तब और हिंसक हो गया है।  वहीं इस हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत और करीब तीन हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हिंसा की वजह से शिक्षण संस्थान, रेलवे, इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई है। प्रधानमंत्री शेख हसीना की तरफ से छात्रों के इस विरोध-प्रदर्शन और हिंसा पर लगाम लगाने के लिए सेना को भी तैनात किया गया है। इतना ही नहीं किसी भी प्रदर्शनकारी को देखते ही गोली मारने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

पहले कब हुआ विरोध, तब क्या हुआ था फैसला?
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यह पहली बार नहीं है, जब बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है, इससे पहले साल 2018 में भी आरक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन के साथ हिंसा हुई थी। जिसके बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उच्च श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण को रद्द कर दिया। जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। लेकिन इस साल पिछले महीने यानी जून की पांच तारीख को बांग्लादेश की हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर दायर एक याचिका पर फैसला सुनाया और सरकार के आरक्षण रद्द करने के फैसले को रद्द बताया। कोर्ट के इस फैसल के बाद फिर सरकारी नौकरियों में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के सगे-संबंधियों को आरक्षण मिलना फिर से लागू हुआ था।
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