Bangladesh rooppur nuclear plant
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बांग्लादेश के सामने रूस को भुगतान करने की एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उसे देश में रूस की मदद से बन रहे परमाणु संयंत्र के बदले ये भुगतान करना है। इसमें एक दिक्कत यह है कि यूक्रेन युद्ध के बाद लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस को ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग भुगतान प्रणालियों से बाहर कर दिया गया है। दूसरी समस्या बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार घट रही डॉलर की मात्रा भी है।
ढाका से लगभग 140 किलोमीटर पश्चिम में स्थित रूपपुर बन रहे परमाणु संयंत्र को देश का सबसे बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बताया जाता है। यह संयंत्र जब काम करना शुरू कर देगा, तब इससे 2,400 मेगावाट बिजली पैदा होगी। उससे डेढ़ करोड़ घरों की बिजली जरूरत पूरी की जा सकेगी। इस परियोजना पर 12.65 बिलियन डॉलर खर्च हो रहे हैं। इसका 90 फीसदी हिस्सा रूस ने ऋण के रूप में दिया है। पिछले साल फरवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इसे लौटाने की तीन किस्तें चुकाने में बांग्लादेश नाकाम हो चुका है। इस तरह वह 11 करोड़ डॉलर की रकम रूस को वापस नहीं कर पाया है।
रूपपुर प्रोजेक्ट के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आलोक चक्रवर्ती के मुताबिक पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण दिक्कत आ रही है। उधर रूस बांग्लादेश से जल्द भुगतान चाहता है। रूस की परमाणु एजेंसी रोसातोम बांग्लादेश सरकार को कई चिट्ठियां भेज चुका है, जिसमें भुगतान संबंधी समस्या का समाधान ढूंढने को आग्रह किया गया है।
बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक- बांग्लादेश बैंक के प्रवक्ता मेजबुल हक ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में इस बात का खंडन किया कि बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के कारण रूस को भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश 11 करोड़ डॉलर की रकम ही समय पर नहीं चुका पाया है, जो ‘कोई बड़ी रकम नहीं’ है। यह रकम 2013 में लिए गए एक कर्ज के बदले चुकाई जानी थी।
जानकारों के मुताबिक ज्यादा बांग्लादेश के सामने समस्या इस बात से खड़ी हुई है कि 2016 में 4.97 बिलियन डॉलर के एक अन्य कर्ज के लिए हुए करार से संबंधित ऋण की किस्तें रूस नहीं दे पा रहा है। इस ऋण को चुकाने की शुरुआत 2027 से होनी है, इसलिए इसका फौरी बोझ बांग्लादेश पर नहीं है। जबकि रूस से ऋण की किस्तें ना आने के कारण प्रोजेक्ट पर काम की गति धीमी हो गई है।
तय कार्यक्रम के मुताबिक रूपपुर प्लांट से 2024 में बिजली का उत्पादन शुरू होना है। लेकिन अभी धीमी पड़ी रफ्तार को देखते हुए अंदेशा जताया जा रहा है कि संभवतः अब ऐसा ना हो पाए। जानकारों के मुताबिक यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण बांग्लादेश को कई दूसरी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है।
पिछले दिसंबर में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बांग्लादेश को रूस के एक बड़े मालवाही जहाज को लौटा देना पड़ा। बताया जाता है कि इस जहाज में परमाणु संयंत्र के कुछ पाट-पुर्जे भी थे। इस बीच बांग्लादेश के विज्ञान और टेक्नोलॉजी मंत्री यीफेश उस्मान ने कहा है कि जल्द ही बांग्लादेश का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रूस जाएगा, ताकि पेश आ रही दिक्कतों का हल निकाला जा सके।