Bangladesh: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार 2024 के हिंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है। यह कदम हाल ही में दो 'जुलाई योद्धाओं' की गिरफ्तारी और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के चलते उठाया गया है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार 2024 के प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए एक अध्यादेश लाने की योजना बना रही है। अंतरिम सरकार इन्हें 'जुलाई योद्धा' कहकर संबोधित करती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क पर इन हिंसक प्रदर्शनों के कारण ही तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हुई थी।
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प्रोथोम आलो और इत्तेफाक अखबारों ने बताया कि 'जुलाई योद्धाओं' को कानून से संरक्षण देने के लिए अध्यादेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को गृह सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों को दिए गए कानूनी संरक्षण जैसे प्रावधान लागू करने पर विचार किया गया।
खबरों में कहा गया है कि सरकार को यह कदम उठाने के लिए दो हालिया घटनाओं ने मजबूर किया। पहली घटना में 25 दिसंबर को 'जुलाई योद्धा' तहरीमा जन्नत सुरोवी को उगाही और ब्लैकमेल के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में गाजीपुर की एक स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई।
दूसरी घटना में पूर्वोत्तर हबीगंज में पुलिस ने महदी हसन को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप था कि वह एक भीड़ के साथ थाने गए और थाना प्रभारी को धमकाया। हबीगंज की अदालत ने अगले दिन उन्हें भी जमानत दे दी।
इन दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद 'भेदभाव विरोधी छात्र' (एसएडी) संगठन के कार्यकर्ताओं ने ढाका, हबीगंज और अन्य जगहों पर बड़े प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार नेताओं की बिना शर्त रिहाई और 'जुलाई योद्धाओं' को भविष्य में कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए विशेष कानून की मांग की, जिसके बाद सरकार ने अध्यादेश लाने की पहल शुरू की।