बांग्लादेश में कर्ज डिफॉल्ट में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर यहां के दौरे पर आए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की टीम ने चिंता जताई है। आईएमएफ ने पिछले वर्ष बांग्लादेश के लिए कर्ज मंजूर करते वक्त डिफॉल्ट कर्ज यानी तमाम नॉर परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) को वसूलने की शर्त लगाई थी। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस मुद्दे पर प्रगति ना होने के कारण आईएमएफ की टीम खुश नहीं है। आईएमएफ की टीम ने वित्त विभाग के अधिकारियों से यहां बातचीत की है।
वित्त मंत्रालय के राजकोषीय प्रभाग के सचिव शेख मोहम्मद सलीम उल्लाह से बातचीत के दौरान आईएमएफ की टीम ने इस बात पर निराशा जताई कि डिफॉल्ट कर्ज की वसूली की प्रक्रिया बहुत धीमी रही है। आईएमएफ ने इसके लिए जो लक्ष्य तय किए थे, उस लिहाज से बांग्लादेश सरकार का रिकॉर्ड बहुत कमजोर रहा है। बांग्लादेश के अधिकारियों ने आईएमएफ की टीम को बताया कि डिफॉल्ट ऋण को वसूलने की मुहिम अब तेज की जा रही है।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने आईएमएफ की टीम के सामने डिफॉल्ट कर्ज के बारे में पिछले तीन साल के आंकड़ों का प्रेजेंटेशन किया। इससे यह बात सामने आई कि इस दौरान हर वर्ष ऐसे कर्ज की मात्रा बढ़ती गई है। 2020 में यह 7.66 फीसदी था, जो 2022 के आखिर में 8.16 फीसदी तक पहुंच गया। विश्लेषकों के मुताबिक यह देश में आम लोगों और कारोबारियों की बढ़ती आर्थिक मुश्किलों का संकेत है।
इन आंकड़ों को देखने के बाद आईएमएफ की टीम ने पूछा कि जब डिफॉल्ट कर्ज में बढ़ोतरी हो रही है, तो भविष्य में आखिर बांग्लादेश सरकार इसे किस तरह घटाएगी। इसके जवाब में अधिकारियों ने कहा- लक्ष्य हमेशा अधिक ऊंचे रखे जाते हैं, जिस वजह से उन्हें हासिल करना कठिन नजर आता है। लेकिन इसमें चिंतित होने की कोई बात नही है। भविष्य में लक्ष्य और बढ़ाया जाएगा, जिससे वसूली तेज होगी और डिफॉल्ट कर्ज की मात्रा में कमी आएगी।
विश्लेषकों के मुताबिक आईएमएफ की टीम ने बांग्लादेश सरकार को उसके सामने मौजूद चुनौतियों से आगाह किया है। उसने साफ संकेत दिया है कि जिस आकलन के आधार पर बांग्लादेश को आईएमएफ ने ऋण दिया था, अगर सरकार का प्रदर्शन उसके अनुरूप नहीं रहा, तो बांग्लादेश के बारे में आईएमएफ अपने आकलन पर पुनर्विचार कर सकता है।
आईएमएफ ने जहां श्रीलंका को काफी जद्दोजहद के बाद कर्ज दिया और पाकिस्तान को मंजूर कर्ज जारी करने के लिए अभी तक राजी नहीं हुआ है, वहीं बांग्लादेश को बहुत आसानी से ऋण मिल गया। ऐसा बांग्लादेश की पुरानी साख के कारण हुआ। लेकिन आईएमएफ के अधिकारी अब बांग्लादेश में बन रहे हालात से चिंतित हैं।
बांग्लादेश सरकार के अधिकारी सार्वजनिक बयानों में आईएमएफ की टीम के इस दौरे को ज्यादा तवोज्जो नहीं दे रहे हैं। शेख मोहम्मद सलीम उल्लाह ने बांग्लादेश के अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा कि आईएमएफ टीम का यह एक रूटीन दौरा था। जहां तक बांग्लादेश का सवाल है, तो उसने साल 2026 तक सभी डिफॉल्ट कर्जों की वसूली का वादा किया है। अभी वह समयसीमा बहुत दूर है।