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Bangladesh: जुलाई विद्रोह हत्याकांड पर फैसला फिर टला, 26 जनवरी को आएगा निर्णय; फैसले में क्यों हो रही देरी?

Tue, 20 Jan 2026 03:03 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई छह हत्याओं से जुड़े मामले में फैसला छह दिन के लिए टाल दिया है। इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों पर मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप हैं। आइए जानते हैं इस मामले की सुनवाई कहां तक पहुंची है और बार-बार फैसला क्यों टल रहा है।
 
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बांग्लादेश में प्रदर्शन की तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं को लेकर चल रहे अहम मामले में फैसला एक बार फिर टल गया है। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने आठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुनाया जाने वाला फैसला छह दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस मामले में फैसला 26 जनवरी को सुनाया जाएगा। यह मामला देश के हालिया राजनीतिक इतिहास से जुड़ा सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में शामिल है।
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फैसले में देरी क्यों
  • अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण का फैसला अभी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है।
  • तीन न्यायाधीशों की पीठ के अध्यक्ष जस्टिस गोलाम मोर्तुजा मोजुमदार ने इसकी जानकारी दी।
  • इसी वजह से अदालत तय तारीख पर फैसला सुनाने में असमर्थ रही।
  • इससे पहले अदालत ने 20 जनवरी को निर्णय सुनाने की तारीख तय की थी।
  • मामला 2024 के हिंसक छात्र आंदोलन से जुड़ा है।
  • इस आंदोलन के दौरान छह लोगों की मौत हुई थी।
  • पुलिस अधिकारियों पर मानवता के खिलाफ अपराध के गंभीर आरोप हैं।

किन अधिकारियों पर है आरोप?
इस केस में ढाका के तत्कालीन पुलिस आयुक्त हबीबुर रहमान, पूर्व संयुक्त आयुक्त सुदीप कुमार चक्रवर्ती समेत आठ पुलिसकर्मी आरोपी हैं। इनमें से चार आरोपियों के खिलाफ सुनवाई गैरहाजिरी में हुई है। अदालत ने इन पर 2024 के ‘जुलाई विद्रोह’ के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप तय किए हैं।
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जुलाई विद्रोह और सत्ता परिवर्तन
2024 का छात्र आंदोलन, जिसे ‘जुलाई विद्रोह’ कहा जाता है, बांग्लादेश की राजनीति का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इसी आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इससे पहले इसी मामले में शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल को गैरहाजिरी में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। उनके खिलाफ भी मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप तय किए गए थे।

पुरानी सरकार के नेताओं पर कार्रवाई
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में शेख हसीना की अब भंग हो चुकी आवामी लीग के कई नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ भी मुकदमे चल रहे हैं। इन मामलों की निगरानी मौजूदा अंतरिम सरकार कर रही है। यह सरकार नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में काम कर रही है, जिसने सत्ता संभालने के बाद इन मामलों को आगे बढ़ाने का फैसला लिया।
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अभियोजन टीम में बदलाव
इस बीच अभियोजन पक्ष में भी बड़ा बदलाव सामने आया है। न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने बताया कि अंतरिम सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून विशेषज्ञ टोबी कैडमैन का अनुबंध आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कैडमैन ने इस्तीफा नहीं दिया था। कैडमैन इससे पहले भी बांग्लादेश के युद्ध अपराध मामलों से जुड़े रहे हैं और 1971 के मुक्ति संग्राम से जुड़े मामलों में भी भूमिका निभा चुके हैं।

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