बांग्लादेश राष्ट्रीय हिंदू महा गठबंधन के महासचिव मृत्युंजय कुमार राय ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह संगठन भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को फैलाता है और गरीबों की भलाई के लिए काम करता है।
मृत्युंजय राय ने कहा, हम इसका (इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग) कड़ा विरोध करते हैं। इस्कॉन ने ऐसा क्या किया है? इस्कॉन एक शांतिपूर्ण संगठन है, जो श्रीकृष्ण के संदेश को फैलाता है और गरीबों की भलाई के लिए काम करता है।
चिन्मय दास को जेल भेजने पर क्या बोले मृत्युंजय कुमार राय
हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरे और इस्कॉन से जुड़े चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर राय ने कहा, 'मैं यह पूछना चाहता हूं कि चिन्मय दास ने ऐसा क्या किया है, जिसे राजद्रोह कहा जा सके? हमने चटगांव में एक शांतिपूर्ण सभा आयोजित की थी, जिसमें बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई गई थी। यह सभा सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि, हमारी सुरक्षा और संरक्षण के लिए थी। हम चाहते हैं कि हिंदुओं पर किए गए सभी अत्याचारों की जांच की जाए और दोषियों को सजा दी जाए।' दास की गिरफ्तार पर राय ने सरकार से अपील करते हुए कहा, हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस्कॉन के चिन्मय दास को रिहा किया जाए।
क्या है पूरा मामला
चिन्मय दास सहित 19 लोगों के खिलाफ चटगांव के थाने में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने 25 अक्तूबर को चटगांव के न्यू मार्केट इलाके में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद से जुड़े राणा दासगुप्ता ने कहा कि चिन्मय के ऊपर झूठा मुकदमा बनाया गया है। उन्होंने कहा, जिसे बांग्लादेश का राष्ट्रीय ध्वज बताया जा रहा है, वह बांग्लादेश का ध्वज था ही नहीं। क्योंकि इस ध्वज पर चार तिरंगे बने हुए थे, जिसके ऊपर उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। सरकार किसी न किसी तरीके से अल्पसंख्यकों की आवाज को दबाने के लिए झूठे मामले बना रही है।
भारत ने जताई नाराजगी
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की। विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि हिंदुओं पर हमला करने वाले बेखौफ घूम रहे हैं, जबकि हिंदुओं के लिए सुरक्षा का अधिकार मांगने वाले हिंदू नेताओं को जेल में ठूंसा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि बांग्लादेश सरकार ने विदेश मंत्रालय के बयान पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि यह उनका आंतरिक मामला है और भारत के टिप्पणी करने से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ सकती है।
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