बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस।
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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक ऐसी चिट्ठी जारी की जिससे यहां रह रहे हिंदू अधिकारियों और कर्मचारियों में भय का माहौल पैदा हो गया है। दरअसल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से सभी मंत्रालयों में काम कर रहे हिंदू अधिकारियों की पूरी सूची मांगी है। इस सूची में देश के सभी मंत्रालयों और विभागों में काम करने वाले हिंदू धर्म से संबंधित समान रैंक के अधिकारी और उससे ऊपर के संयुक्त सचिवों तथा अन्य कर्मचारियों का पूरा ब्योरा मांगा गया है। बांग्लादेश में हाल के दिनों में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान हिंदू संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। अमर उजाला डॉट कॉम से बात करते हुए फ्रीडम फॉर हिंदू राइट्स इन बांग्लादेशी ऑर्गेनाइजेशन ने कहा कि बीते कुछ दिनों के भीतर बांग्लादेश में कई विभागों में हिंदुओं को नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा है। इसलिए बांग्लादेश के अंतिम सरकार की ओर से आए इस आदेश को लेकर हिंदू अधिकारियों में दहशत है।
दरअसल बांग्लादेश के अंतरिम सरकार की ओर से 27 अगस्त को एक आदेश सभी अलग-अलग मंत्रालयों को भेजा गया। इस आदेश के मुताबिक मंत्रालयों से कहां गया कि सितंबर के पहले सप्ताह तक सभी हिंदू अधिकारियों की पूरी सूची सरकार को सौंपी जाए। हालांकि यह आदेश बहुत सीक्रेट तरीके से सभी मंत्रालयों को भेजा गया। अमर उजाला डॉट कॉम के पास बांग्लादेश सरकार के उस आदेश की कॉपी मौजूद है। फिलहाल इस आदेश के बाद बांग्लादेश के उन सभी मंत्रालयों में हड़कंप मच गया जहां पर हिंदू अधिकारी कार्यरत हैं। जानकारी के मुताबिक जो चिट्ठी अलग-अलग मंत्रालयों को जारी हुई है उसमें अंतरिम सरकार की ओर से कहा गया है की अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी रैंक के साथ जानकारी सितंबर के पहले सप्ताह तक उपलब्ध करा दी जाए।
इसके लिए बाकायदा बांग्लादेश सरकार ने न सिर्फ एक विशेष ईमेल आईडी जारी की है। बल्कि संबंधित मंत्रालय के अधिकारियों को सॉफ्ट और हार्ड कॉपी के तौर पर पूरी डिटेल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। अमर उजाला डॉट कॉम से बात करते हुए फ्रीडम फॉर हिंदू राइट्स इन बांग्लादेशी ऑर्गेनाइजेशन के सोमेश बनर्जी कहते हैं कि बांग्लादेश सरकार की चिट्ठी से यहां काम करने वाले हिंदू कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। उनका कहना है कि जिस तरीके के हालात बांग्लादेश में इस समय बने हुए हैं उसमें हिंदुओं के लिए विशेष तौर पर मांगी गई जानकारी डर पैदा करती है की क्या उनकी नौकरियां या उनके पद सुरक्षित हैं या नहीं। दरअसल उनका तर्क है कि 5 अगस्त के बाद बांग्लादेश के अलग-अलग विश्वविद्यालय से तकरीबन पचास हिंदू शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया गया है। कई अलग अलग जगह पर इस तरीके की धमकियां हिंदुओं को दी जा रही हैं। अब ऐसे हालातों में सरकार की ओर से जुटाए जाने वाली जानकारी से डर का माहौल बन रहा है।
बनर्जी कहते हैं उनके संगठन ने चिट्ठी के जारी होने के बाद सरकार के नुमाइंदों से बात की तो उनको एक अलग ही बात बताई गई। वह कहते हैं उनको कहा गया कि यह सूची आने वाले दिनों में सरकार की ओर से हिंदू रीति रिवाज और त्योहार पर आमंत्रित किए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाने के लिए तैयार की गई है। हालांकि फ्रीडम फॉर हिंदू राइट्स इन बांग्लादेशी ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि वह सरकार की दलील को नहीं मानते। क्योंकि जिस तरीके से बांग्लादेश में तख्तापलक के बाद हिंदुओं के साथ अत्याचार हो रहा है उसमें इस तरीके की चिट्ठी का जारी होना सिर्फ भय का माहौल ही पैदा करता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में चीन और बांग्लादेश स्टडी के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक प्रताप सिंह कहते हैं कि यह चिट्ठी सामान्य चिट्ठी तो बिल्कुल नहीं हो सकती। उनका कहना है कि जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार थी तो जाहिर सी बात है वहां पर अधिकारियों की नियुक्तियां भी उनके लिहाज से ही की गई थी। क्योंकि अब अंतरिम सरकार है और वहां पर बड़ा तख्ता पलट हुआ है तो शेख हसीना के समय नियुक्त किए गए अधिकारियों की तैनाती अब कैसे बरकरार रह सकती है। उनका कहना है कि देर सवेर इस चिट्ठी का असर इन अधिकारियों पर किसी न किसी तरह से गाज गिरने के लिहाज से ही होगी।
वह कहते हैं कि जिस तरीके से लगातार सूचनाएं मिल रही हैं कि बांग्लादेश में हिंदू अधिकारियों कर्मचारियों और नौकरी पेशा लोगों को अपने पेशे से हाथ धोना पड़ रहा है। वह आने वाले दिनों में बनने वाली नई सरकार के साथ संभवत और बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। अभिषेक प्रताप सिंह कहते हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के मद्देनजर इस चिट्ठी की प्रतिक्रिया पर नजर रखनी होगी। उनका कहना है कि इस बात की संभावना से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता की ऐसी स्थियों वहां पर बड़े हिंदू अधिकारी और कर्मचारियों को परेशान न होना पड़े।