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Dhaka: चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश हाईकोर्ट से दो मामले में जमानत, तस्लीमा नसरीन ने गिरफ्तारी को बताया अवैध

Sun, 02 Aug 2026 08:52 PM IST
Pavan एएनआई, ढाका / कोलकाता

सार

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को चार में से दो मामलों में जमानत दे दी है। बाकी दो मामलों में 16 अगस्त को सुनवाई होगी। उनकी गिरफ्तारी के बाद हुए विवाद के बीच तस्लीमा नसरीन ने इसे अवैध बताते हुए कहा कि हिंदू समुदाय को एकजुट करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया।
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चिन्मय कृष्ण दास, हिंदू संत और पूर्व इस्कॉन नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश हाईकोर्ट ने हिंदू संत और पूर्व इस्कॉन नेता चिन्मय कृष्ण दास को उनके खिलाफ दर्ज चार मामलों में से दो में जमानत दे दी है। वहीं, बांग्लादेशी लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए कहा कि हिंदू समुदाय को एकजुट करने की उनकी कोशिशें ही उनकी गिरफ्तारी का कारण हो सकती हैं। चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति के.एम. जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहेर शामिल थे, ने रविवार को जमानत का आदेश दिया। अदालत ने बाकी दो मामलों में जमानत याचिकाओं की सुनवाई के लिए 16 अगस्त की तारीख तय की है।
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किन मामलों में मिली जमानत?
चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ हत्या के प्रयास, तोड़फोड़, सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई आरोपों में चार मामले दर्ज हैं। इनमें से दो मामलों में उन्हें राहत मिली है, जबकि अन्य दो मामलों पर सुनवाई अभी बाकी है।
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गिरफ्तारी के बाद हुआ था विवाद
चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित अपमान करने का आरोप लगाया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। 27 नवंबर 2024 को चट्टोग्राम अदालत परिसर के बाहर उनके समर्थकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसी दौरान वकील सैफुल इस्लाम की पीट-पीटकर और धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया। बाद में 19 जनवरी को चट्टोग्राम डिविजनल स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल ने चिन्मय कृष्ण दास सहित 39 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू कर दी।

पहले भी मिली थी जमानत
इससे पहले पिछले वर्ष 30 अप्रैल को हाईकोर्ट ने उन्हें देशद्रोह के मामले में जमानत दी थी। हालांकि, बाद में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय पीठ ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।

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तस्लीमा नसरीन ने क्या कहा?
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्होंने चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का विरोध किया था। उन्होंने कहा, 'हमें नहीं पता कि सरकार ने उन्हें क्यों गिरफ्तार किया। मेरा मानना है कि वह बांग्लादेश के हिंदू समुदाय को एकजुट कर रहे थे और यही उनकी गिरफ्तारी की वजह हो सकती है'।
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हिंदू समुदाय के लिए उठाते रहे हैं आवाज
चिन्मय कृष्ण दास, बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रवक्ता भी रहे हैं। वे लंबे समय से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के अधिकारों की मांग उठाते रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधिकरण और अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग की है।

भारत ने भी जताई थी चिंता
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और लंबे समय तक हिरासत में रहने का मामला भारत और बांग्लादेश के बीच भी चर्चा का विषय बना था। भारत सरकार ने पहले उनके साथ किए गए कथित व्यवहार और हिरासत को लेकर चिंता व्यक्त की थी। वहीं, बांग्लादेश का हिंदू समुदाय लगातार उनकी बिना शर्त रिहाई की मांग करता रहा है।
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