बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक ने देश में डिजिटल बैंक बनाने की पहल की है। इसके लिए एक खाका तैयार किया गया है, जिसे देश के सेंट्रल बैंक- बांग्लादेश बैंक- ने मंजूरी दे दी है। बैंक ने कहा है कि उसका मकसद बांग्लादेश को एक कैशलेस (नकदी-रहित) समाज बनाना है।
बांग्लादेश ने यह लक्ष्य तय किया है कि साल 2027 तक देश में कम से कम 75 फीसदी लेन-देन कैशलेस हो। यह योजना सरकार के 2041 तक ‘स्मार्ट बांग्लादेश’ बनाने के लक्ष्य का हिस्सा है। फिलहाल, देश में 61 परंपरागत बैंक हैं। उनमें से कई एप और अन्य माध्यमों से डिजिटल सेवाएं देते हैं।
बांग्लादेश बैंक ने डिजिटल बैंकों के लिए जो गाइडलाइंस तैयार की हैं, उनके मुताबिक ऐसे जो बैंक बनेंगे, वे डिजिटल के अलावा कोई अन्य सेवा नहीं देंगे। मुख्यालय के अलावा उनके कोई अन्य कार्यालय भी नहीं होंगे। ये बैंक कस्टमर बैंक कार्ड जारी करेंगे। वे क्यूआर कोड और अन्य उन्नत तकनीक के जरिए लेन-देन की सेवाएं देंगे। गाइडलाइंस के ड्राफ्ट में कहा गया है- ‘डिजिटल बैंकों को कुशल, किफायती और नई सेवाएं’ ग्राहकों को देनी होंगी। ये बैंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉक चेन और अन्य उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक बांग्लादेश ने अपनी अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण करने की योजना बनाई है। लेकिन इस समय बांग्लादेश महंगाई, विदेशी मुद्रा घटने और बिजली की किल्लत जैसी समस्या से जूझ रहा है। उसे देखते हुए अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण की तरफ बढ़ना एक कठिन चुनौती है। वैसे सरकार को उम्मीद है कि मोबाइल के जरिए वित्तीय सेवा देने वाली कंपनियां, मौजूदा बैंक, माइक्रो फाइनेंस संस्थान, और अन्य वित्तीय संस्थान डिजिटल बैंक बनाने के लिए आगे आएंगे।
जानकारों के मुताबिक बांग्लादेश की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल वित्त सेवा प्रदाता कंपनी-नगद (nagad) डिजिटल बैंक के लाइसेंस के लिए अर्जी देने वाली पहली कंपनी बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक नगद ने साल 2020 में ही डिजिटल बैंक बनाने की योजना लेकर सरकार से संपर्क किया था।
लेकिन डिजिटल बैंक की योजना सामने के साथ डिजिटल सुरक्षा का सवाल भी उठ खड़ा हुआ है। बांग्लादेश बैंक के पूर्व गवर्नर सलेहुद्दीन अहमद ने कहा है कि डिजिटल बैंक शुरू करने के पहले सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को जरूर हल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन में जो जोखिम हैं, उनको दूर किया जाना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों में ध्यान दिलाया गया है कि साल 2016 में अमेरिका के फेडरल बैंक ऑफ न्यूयॉर्क में मौजूद बांग्लादेश बैंक के खाते की हैकिंग हुई थी, जिसमें उसे आठ करोड़ 10 लाख डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा था। सलेहुद्दीन अहमद ने चेतावनी दी है कि हैकरों की नजर डिजिटल बैंकों पर होगी। उन्होंने कहा- “हैकिंग के जरिए धन की चोरी हुई, तो हम उसे वापस नहीं ला पाएंगे, क्योंकि हमारी वैसी महारत नहीं है। बांग्लादेश की आईटी इंडस्ट्री वैसी कार्रवाइयों के लिए जरूरी मानव संसाधन भी उपलब्ध नहीं है।”
बांग्लादेश ने इस चुनौती को देखते हुए यह शर्त लगाई है कि ऐसे बैंकों को अपने बोर्ड में आधे सदस्य इस तरह के रखने होंगे, जिन्हें टेक्नोलॉजी आधारित बैंकिंग, नई उभरती तकनीकों, और साइबर कानूनों की जानकारी हो।